Indore Muslim Street Name Row: इंदौर के चंदन नगर में क्षेत्रीय पार्षद फातमा खान ने गलियों के नाम इस्लामी विरासत से जोड़कर बोर्ड लगाए, जिसके बाद बीजेपी नेता आकाश विजयवर्गीय भड़क गए और उन्होंने इंदौर महापौर को पत्र लिख कर कार्रवाई की मांग की. उर्दू नाम देखकर इंदौर महापौर भी आनन फानन में एक्शन मोड में आ गए और सारे बोर्ड को हटवा दिया.
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Indore News Today: इंदौर के चंदन नगर इलाके में मुस्लिम समाज से जुड़ी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने की एक कोशिश को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है. स्थानीय पार्षद के जरिये गलियों के नाम इस्लामिक विरासत से जोड़ने की पहल को जहां कुछ लोगों ने साम्प्रदायिक चश्मे से देखा, वहीं सोशल मीडिया पर इसे मुस्लिम समाज की पहचान और योगदान को मान्यता देने का साहसिक कदम भी बताया जा रहा है.
दरअसल, देश के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक इंदौर के चंदन नगर क्षेत्र में गलियों और रास्तों के नाम बदलने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. यहां की क्षेत्रीय पार्षद फातमा खान ने नगर निगम और एमआईसी (कार्यकारी समिति) की इजाजत के बिना इलाके की कुछ गलियों के नाम बदलकर नए बोर्ड लगवा दिए. इन नामों को लेकर यह दावा किया गया कि वे धर्म विशेष से जुड़े हैं.
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब इन नए नामों के बोर्ड जैसे "मिश्रा वाला रोड की जगह ख्वाजा रोड, लोहा गेट की जगह रजा गेट और आम वाला रोड की जगह हुसैनी रोड का बोर्ड लगा दिया गया. नए नामों वाले बोर्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. इन बोर्डों पर 'नगर पालिका निगम इंदौर' का नाम छपा था, जिससे यह भ्रम पैदा हुआ कि ये नाम निगम के जरिये अधिकृत हैं.
उर्दू नाम वाले बोर्ड देखकर मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गी के बेटे और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय भड़क गए. आकाश विजयवर्गीय ने इस मामले को गंभीर बताते हुए इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव को पत्र लिखकर कार्यवाही की मांग की. मामला संज्ञान में आते ही इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी एक्टिव हो गए हैं, उन्होंने इस तरह से बोर्ड लगाने को असंवैधानिक करार देते हुए तत्काल हटाने का फरमान सुना दिया.
महापौर भार्गव ने कहा कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नगर निगम के नियमों के खिलाफ है. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि न सिर्फ बोर्ड हटाए जाएं बल्कि इस तरह के काम करने वाले खिलाफ भी कार्रवाई की जाए. साथ ही उन्होंने इस मामले की जांच करने के भी निर्देश दिए. इंदौर महापौर ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर निगम का कोई कर्मचारी या अधिकारी इसमें शामिल पाया गया तो उन पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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