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Gaza: गाजा में पत्रकारों की हत्याएं इजराइल के ऊपर कई तरह से के सवाल खड़ी करती हैं. हमेशा से आरोप लगते आए हैं कि यहूदी मुल्क हमेशा से ही गाज़ा के पत्रकारों को निशाना बनाता आया है. बीते वीकएंड में अल जज़ीरा के एक संवाददाता की इज़राइल के जरिए टारगेटेड हत्या ने दुनिया का ध्यान खींचा है. यह घटना
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स नाम की संस्था के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में गाज़ा युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 184 फिलिस्तीनी पत्रकार और मीडिया कर्मी मारे जा चुके हैं, जबकि रूस-यूक्रेन जंग में यह तादा अब तक 18 है.
अल जज़ीरा मैनेजमेंट ने सोमवार को कहा कि वे गाज़ा की सच्चाई दिखाना बंद नहीं करेंगे और दुनिया भर के मीडिया संगठनों से अधिक पत्रकारों को नियुक्त करने की अपील की है. इज़राइल ने इंटरनेशनल मीडिया को गाज़ा में एंट्री करने से रोक रखा है. ऐसे में दुनिया तक खबरें पहुंचाने का जिम्मा मुख्य रूप से गाज़ा के स्थानीय पत्रकारों और उनकी मेहनत पर टिका है. इज़राइल अक्सर फिलिस्तीनी पत्रकारों की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, लेकिन अन्य मीडिया को अंदर आने की अनुमति नहीं देता है.
पत्रकारों का कहना है कि उन्होंने दूसरी जंगों में भी रिपोर्टिंग की है, लेकिन उन्होंने ऐसे हालात कभी नहीं देखे हैं. अल जज़ीरा के संवाददाता अनस अल-शरीफ़ को पता था कि वे निशाने पर हैं. उन्होंने अपनी मौत के बाद पढ़े जाने के लिए एक संदेश भी लिखा था.
रविवार को गाज़ा सिटी के सबसे बड़े अस्पताल परिसर के बाहर एक हवाई हमले में वे और सात अन्य लोग जिनमें छह पत्रकार थे मारे गए. इज़राइल ने दावा किया कि अल-शरीफ़ हमास के एक सेल का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन इसके सबूत नहीं दिए. अल जज़ीरा और अल-शरीफ़, दोनों ने इस आरोप को खारिज किया था.
अनस अल-शरीफ़ ने अपने पहले से लिखे संदेश में कहा था, "मैंने दर्द के हर पहलू को जिया है, कई बार दुख और नुकसान का स्वाद चखा है, लेकिन कभी भी सच दिखाने में हिचकिचाया नहीं." अपनी मौत वाले दिन 10 अगस्त को किए गए आखिरी पोस्ट में उन्होंने एक हमले के बाद के हालात का भी जिक्र किया था. उन्होंने लिखा था,"चारों तरफ खून और शरीर के टुकड़े बिखरे थे, लाशें एक-दूसरे के ऊपर पड़ी थीं. बताइए, कोई पत्रकार इस भयावह दृश्य को कैसे शब्दों में बयां कर सकता है?
इजरइल के पत्रकारों को निशाना बनाने के पीछे अहम वजह सच को छिपाना माना जा रहा है. इजराइल बिलकुल नहीं चाहता है कि जो वह गाजा में कर रहा है सामने निकलकर आए. मिसाल के तौर पर खाना लेने गए लोगों पर फायरिंग को लेकर हमेशा से इजराइल को निशाना बनाया जा रहा है. वह जिस तरह से मिसाइल से आम लोगों की हत्याएं करता है उसके जरिए आम लोगों को निशाना बनाता है उसे दिखाने का काम पत्रकार कर रहे हैं. अगर ये पत्रकार खौफ से चुप हो जाते हैं या फिर सभी मारे जाते हैं तो इजराइल जो चाहे गाजा में कर सकता है और इसकी भनक लोगों को बिलकुल नहीं लगेगी.