Jamaat-E-Islami Workshop: जमात-ए-इस्लामी ने दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में 5 दिवसीय वर्कशॉप प्रोग्राम चलाया, जिसमें मुस्लिम समाज की समस्याओं को हल करने और देश की मौजूदा हालातों पर चर्चा हुई. साथ ही उलेमा को यह संदेश दिया गया कि विचारधाराओं के मतभेद से उपर उठकर समाज के लिए काम करना होगा. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.
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Jamaat-E-Islami Workshop: जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द (JIH) के मुख्यालय में 5 दिवसीय वर्कशॉप प्रोग्राम का आयोजन किया गया था. इस वर्कशॉप प्रोग्राम में देश भर के अलग-अलग विचारधाराओं और मदरसों से जुड़े लगभग 120 उलेमा ने हिस्सा लिया. इस वर्कशॉप प्रोग्राम के अंतिम दिन जमात-ए-इस्लामी हिंद ने मुसमलान उलेमाओं को संदेश दिया कि उन्हें फिरकापरस्ती और विचारधाराओं से उपर उठकर मुस्लिम समाज की बेहतरी के लिए काम करना होगा.
इस वर्कशॉप प्रोग्राम में कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे. इस दौरान जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द के उपाध्यक्ष मौलाना वलीउल्लाह सईदी ने भी अपना विचार रखा. उन्होंने कहा कि उलेमा को फिरकापरस्ती और विचारधारा के आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकता और सहयोग की भावना से आगे बढ़ना चाहिए.
वर्कशॉप का मकसद क्या था?
वहीं, जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द के शरीयत काउंसिल के सचिव डॉ. मोहम्मद राजीउल इस्लाम नदवी इस वर्कशॉप के उद्देश्यों पर जोर देते हुए कहा कि इस वर्कशॉप का मकसद उलेमा को उनकी जिम्मेदारियों की याद दिलाना और विचारधारा के मतभेद से अलग, आपसी सहयोग के साथ काम करने के लिए प्रेरित करना है.
इन विषयों पर हुई चर्चा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस पांच दिवसीय वर्कशॉप प्रोग्राम में मुस्लिम समाज से जुड़े 21 विषयों और समस्याओं पर चर्चा हुई. इन्हीं विषयों में देश की परिस्थितियां और मुस्लिम समुदाय की समस्याओं का विषय भी शामिल था. इस वर्कशॉप के अंतिम दिन जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख चेहरे और जिम्मेदार मौजूद थे.
मुस्लिम समाज के अधिकारों के संरक्षण के लिए जमात-ए-इस्लामी करता है ये काम
साथ ही इस वर्कशॉप के आखिरी दिन एक ऑपन सेशन भी रखा गया था. इस दौरान वर्कशॉप में आए उलेमा जमात-ए-इस्लामी के जिम्मेदारों से अपने सवाल पूछे और जमात-ए-इस्लामी के जिम्मेदारों ने उन सवालों के जवाब दिया. गौरतलब है कि जमात-ए-इस्लामी हिंद भारत में मुस्लिम समाज के मुद्दों और उनकी समस्याओं को हल करवाने के लिए काम करता है. साथ ही मुस्लिम समाज के अधिकारों के हनन के लिए कानूनी और संवैधानिक संघर्ष भी करता है.