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Jamia Millia Islamia News: जिस पेशे से समाज को ज्ञान, नैतिकता और मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद होती है. अगर उसी पेशे से जुड़ा शख्स भरोसे को तोड़ दे, तो उसका असर सिर्फ एक शख्स तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे पूरा परिवार तबाह हो जाता है. राजधानी दिल्ली से सामने आया यह मामला भी कुछ ऐसा ही है, जहां जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) के कैमिस्ट्री डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर पर दोस्ती की आड़ में एक दलित छात्र पर आर्थिक शोषण और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
इस मामले में रोहिणी सेक्टर-7 थाना क्षेत्र में पीड़िता की बीवी ने लिखित में शिकायत दर्ज कराई है. इसमें आरोप लगाया है कि उसके शौहर नरेंद्र कुमार के साथ उनके पुराने दोस्त और सहपाठी अमित कुमार ने धोखाधड़ी की. शिकायत के मुताबिक, नरेंद्र कुमार और अमित कुमार पहले सहपाठी और बाद में सहकर्मी रहे. समय के साथ दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई. इसी दोस्ती और भरोसे का फायदा उठाकर अमित कुमार ने नरेंद्र से बार-बार पैसे उधार लेने शुरू कर दिए.
भाग्यश्री के मुताबिक, नरेंद्र कुमार की कोई स्थायी नौकरी नहीं थी. इसके बावजूद वह हर बार किसी न किसी तरह पैसों का इंतजाम कर अमित कुमार की मदद करते रहे. धीरे-धीरे यह मदद आर्थिक बोझ में बदलती चली गई. शिकायत में कहा गया है कि साल 2021- 2022 के दौरान अमित कुमार ने नरेंद्र को जामिया मिलिया इस्लामिया में पीएचडी में पंजीकरण कराने का लालच दिया. बेहतर भविष्य और करियर की उम्मीद में नरेंद्र ने उनकी बातों पर भरोसा किया और पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन करवा लिया.
इस शिकायत में भाग्यश्री ने बताया कि एडमिशन के बाद के बाद भी आरोपी ने पैसों की मांग बंद नहीं की. आरोप है कि पीएचडी से जुड़े खर्चों के नाम पर अमित कुमार लगातार नरेंद्र से पैसे मांगते रहे. नरेंद्र ने कई जगहों से पैसे जुटाए और अपने दोस्तों से मदद लेकर करीब 10 लाख रुपये नकद अमित कुमार को दिया. उन्होंने बताया कि यह रकम पूरी तरह विश्वास के आधार पर दी गई थी, जिसने नरेंद्र की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया.
शिकायत में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का पूरा ब्यौरा भी दिया गया है. पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग तारीखों में आरोपी असिस्टेंट अमित कुमार को कुल 11 लाख 91 हजार 100 रुपये की राशि ऑनलाइन ट्रांसफर की गई. वहीं, नकद सहायता को जोड़ने के बाद कुल रकम लगभग 21 लाख 91 हजार 100 रुपये तक पहुंच जाती है. शिकायत में दर्ज रकम सालों में कई बार छोटे- बड़े भुगतान के रूप में दी गई, जिसमें 50 हजार, 4.5 लाख, 2.5 लाख और अन्य कई ट्रांजैक्शन शामिल हैं.
भाग्यश्री का आरोप है कि आरोपी अमित कुमार के रवैये और लगातार आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव ने नरेंद्र की सेहत पर गंभीर असर डाला. इसकी वजह से 2 अक्टूबर 2024 को उन्होंने किसी तरह अपना शोध प्रबंध जमा किया, लेकिन इसके तुरंत बाद वायवा के नाम पर अमित कुमार ने एक लाख रुपये की और मांग कर दी. इसी तनाव की वजह से 8 अक्टूबर 2024 को नरेंद्र को दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मौत हो गई.
भाग्यश्री ने बताया कि अब वह चार महीने के बेटे के साथ पूरी तरह अकेली हैं. परिवार की जमा पूंजी खत्म हो चुकी है और जीवनयापन का कोई सहारा नहीं बचा है. उन्होंने पुलिस से मांग की है कि उनके पति के जरिये अमित कुमार को दिए गए सभी पैसे वापस दिलाने में मदद की जाए और मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की जाए. पीड़िता ने इस संबंध में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के वाइस चांसलर को भी लिखित में शिकायत दर्ज कराई है.
इस संबंध में जब फोन पर JMI वीसी और रजिस्ट्रार के ऑफिस में कांटैक्ट करने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो पाया, जबकि वाइसचांसलर डॉक्टर मज़हर आसिफ का फोन नहीं लगा. वहीं, रजिस्ट्रार महताब आलम रिजवी के नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया.
JMI के एक स्टाफ ने नाम छापने की शर्त पर इस केस से जुड़ी अपडेट के लिए यूनिवर्सिटी के मीडिया कोऑर्डिनेटर सायमा सईद से संपर्क करने को कहा. JMI मीडिया कोऑर्डिनेटर सायमा सईद से फोन पर नरेंद्र नाम के छात्र के साथ हुई धोखाधड़ी और शिकायत को लेकर जब पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में अनभिज्ञता जताई और कहा कि इस केस के बारे में जिससे शिकायत की गई, उनसे बात करें.
साइया सईद को जब बताया गया कि इसकी शिकायत JMI वीसी से मृतक नरेंद्र की बीवी ने की है, ऐसे में आप बताएं कि इस केस से जुड़ी अपडेट के लिए किससे संपर्क करें. इस पर JMI मीडिया कोऑर्डिनेटर नाराज हो गईं. उन्होंने मीडिया एथिक्स फॉलो न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह हमेशा इनबॉक्स में नहीं बैठी रहती हैं. उन्हें इसकी जानकारी जी मीडिया के जरिये की गई कॉल से पता चला है.
हैरान करने वाली बात तो यह कि एक ऐसी घटना जिसकी वजह से एक छात्र की जान चली गई, उन्होंने इसे 'प्रश्न की प्रकृति व्यक्तिगत होने की वजह' बताते हुए अगले दो से तीन दिनों में जवाब देने को कहा. यह शिकायत अब पुलिस के पास है, जिसमें धोखाधड़ी, मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. मामला उस भरोसे पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, जहां एक शिक्षक, दोस्त और इंसान तीनों रिश्तों के नाम पर भरोसा किया गया था. इतने दिन बीत जाने के बावजूद JMI के अधिकारियों का केस पर अनभिज्ञता जताना संदेह पैदा करता है.