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Jamia Millia Islamia Islamia News:
जामिया मिल्लिया इस्लामया (JMI) प्रशासन नए सेशन में पीएचडी में एडमिशन के लिए गुरुवार को नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. एडमिशन के योग्य छात्र यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट admission.jmi.ac.in पर जाकर चेक कर सकते हैं. पीएचडी में अप्लाई करने के लिए उम्मीदवारों को 2,000 रुपये अप्लीकेशन फीस जमा करनी होगी. अप्लाई करने की आखिरी तारीख 8 नवंबर 2025 रखी गई है. हालांकि, पिछले सेशन के मुकाबले इस बार जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने पीएचडी अप्लीकेशन फीस में लगभग 33.33 फीसदी इजाफा कर दिया है.
दरअसल, हर साल देश के कोने-कोने से हजारों छात्र उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामया (JMI)का रुख करते हैं. जामिया मिल्लिया इस्लामिया सस्ती और मेयारी तालीम के लिए छात्रों को अपनी तरफ आकर्षित करती रही है. हालांकि, इस साल JMI के कई विभागों में फीस में हुई बेतहाशा इजाफे ने गरीब तबके के छात्रों को काफी मायूस किया है. फीस में होने वाली वृद्धि ने स्टूडेंट्स के सामने उहापोह की स्थिति पैदा कर दी है. अगर आप दिल्ली या देश के किसी दूसरी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पीएचडी एडमिशन के फॉर्म की फीस की बात करें, तो ये 500 रुपये से ज्यादा की नहीं होती है, लेकिन जामिया ने इसे इसे बढ़ाकर 2000 कर दिया है.
JMI में पीएचडी में एडमिशन के लिए तैयारी करने वाले कई छात्र प्रशासन के अप्लीकेशन फीस में इजाफे के फैसले से नाराज हैं. बिहार के किशनगंज जिले की सुमैया बीते एक साल से बटला हाउस में रहकर पीएचडी की तैयारी कर रही हैं. उन्होंने यूजीसी की नेट परीक्षा भी पास की है. पीएचडी में अप्लीकेशन फीस 2,000 होने से वह काफी परेशान हैं.
सुमैया ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. उनके वालिद ट्रक पर क्लीनर के तौर पर काम करते हैं और सुमैया भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं. वह जामिया नगर में कुछ ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्च चलाती है, ऐसे में JMI में पीएचडी की फीस 2,000 रुपये होने से उनका मंथली बजट बिगड़ जाएगा.
कमोबेश यही हाल यूपी के महाराजगंज के रहने वाले मोहम्मद हसीब का है. उन्होंने पिछले साल मास्टर किया है और इस साल पीएचडी में अप्लाई करना चाह रहे हैं. 2,000 रुपये अप्लीकेशन फीस को लेकर हसीब ने कहा, "घर से हर महीने 5,000 रुपये खर्च के लिए मिलते हैं, पीएचडी में अप्लाई करने के लिए उन्हें फीस घर से मंगानी पड़ेगी." हसीब के मुताबिक, उनके वालिद ई-रिक्शा चलाते हैं. 2,000 रुपये वालिद साब को मुझे देने के लिए कम से कम से चार से पांच दिन की कमाई भेजनी पड़ेगी.
झारखंड के हजारीबाग से रहने वाले रामानंद कुमार ने भी इस पीएचडी के लिए अप्लाई किया है. बढ़ी हुई फीस को लेकर वह भी काफी परेशान दिखाई पड़े. इस बारे में जब रामानंद कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 2015-16 से पीएचडी स्कॉलर को 8,000 रुपये ही स्टाइपेंड मिलता आ रहा है, जबकि एडमिशन फीस में हर साल लगातार इजाफा हो रहा है. ऐसे में अगर फीस में इजाफा हो रहा है तो रिसर्च स्कॉलर के मंथली स्टाइपेंड में भी इजाफा करना चाहिए, सरकार और यूजीसी को महंगाई को ध्यान में रखते हुए इस पर भी काम करना चाहिए.
रामानंद ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया. उन्होंने बताया कि पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पीएचडी में अप्लाई करते हुए एक कोर सब्जेक्ट के साथ-साथ पिछले साल चार अलॉयड सब्जेक्ट में अप्लाई करने का ऑप्शन था. हालांकि, इस बार छात्र सिर्फ तीन ही प्रिफेरेंस भर सकते हैं. रामानंद कुमार ने JMI वीसी और रजिस्ट्रार से सवाल करते हुए कहा कि जब आपने फीस बढ़ा दी है तो कम से अलॉयड सब्जेक्ट प्रिफेरेंस को बरकरार रखते हुए स्टाइपेंड बढ़ाने के लिए भी सरकार से सिफारिश कर सकते हैं.
छात्र-छात्राएं, जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन के पीएचडी अप्लीकेशन नोटिफिकेशन निकालने के बाद से ही काफी मायूस दिखाई पड़ रहे हैं. कई छात्रों ने आरोप लगाया कि पहले JMI में पीएचडी में एडमिशन नोटिफिकिशन जारी होने के साथ ही प्रॉस्पेक्टस जारी होता है. प्रॉस्पेक्टस में इस बात का भी जिक्र होता है कि किस विभाग में कितनी सीटें खाली हैं. इससे छात्रों को अलॉयड सब्जेक्ट भरने में आसानी होती थी. इससे इच्छुक अभ्यर्थी परेशान कंफ्यूज दिखाई पड़ रहे हैं. छात्रों के मुताबिक, इस बार आवेदन करने के दौरान भी कई खामियां आ रही हैं.