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आसान नहीं है Jamia Nagar और Batla House में Bulldozer चलाना, जानें क्या है चैलेंज?

Batla House and Jamia Nagar Bulldozer: जामिया नगर और बटला हाउस में बुलडोजर एक्शन का डर सता रहा है. लेकिन, ऐसा करना इतना आसान नहीं है. यूपी सरकार ने नोटिस तो चस्पा कर दिए हैं, लेकिन उसके लिए एक चीज़ बड़ी चैलेंज साबित होने वाली है.

आसान नहीं है Jamia Nagar और Batla House में Bulldozer चलाना, जानें क्या है चैलेंज?

Batla House and Jamia Nagar Bulldozer: एक तरफ जहां दिल्ली में बीजेपी सरकार अवैध कब्जे के नाम पर तोड़फोड़ की कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी तरफ यूपी सरकार ने भी दिल्ली में अपनी जमीन पर अवैध कब्जे के नाम पर जामिया नगर से शर्म विहार तक बुलडोजर अभियान चलाने का प्लान बना लिया है. अगर ऐसा होता है तो बड़ी तादाद में लोग मु्तास्सिर होने वाले हैं. 

यूपी सरकार के लिए यह है बड़ा चैलेंज

जामिया नगर के मुरादी रोड पर डिमोलीशन के नोटिस चस्पा करना इसी कड़ी की एक कड़ी है, हालांकि कानूनी जानकार यूपी सरकार के सिंचाई विभाग के बिना किसी सबूत के किए गए दावे पर सवाल उठा रहे हैं. दिल्ली हाई कोर्ट के वकील मोहम्मद हाशिम के मुताबिक, नोटिस जरिए दावा पेश करना बेकार है. यू पी सरकार को पहले कोर्ट में यह साबित करना होगा कि यह जमीन उनकी है, जबकि मुरादी रोड के कई लोगों का दावा है कि सिंचाई विभाग पहले भी कोर्ट में कोई सबूत पेश करने में नाकामयाब रहा है.

इन लोगों को मिला स्टे

दूसरी ओर, गफ्फार मंजिल, नूर नगर और नई बस्ती में भी इसी तरह के नोटिस चिपकाए गए थे, लेकिन अदालत ने वहां के निवासियों को स्टे दे दिया था. जब तक अदालत में यह साबित नहीं हो जाता, तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.

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श्रम विहार का साफ हुआ रास्ता

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट ने श्रम विहार मामले में अदालत ने दोबारा विचार करने की अपील को खारिज कर दिया है, जिससे वहां ध्वस्तीकरण की कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया है. श्रम विहार में पहले भी तोड़फोड़ हो चुकी है, लेकिन वहां मकान बनाने की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है.

स्थानीय लोगों ने क्या कहा?

मुरादी रोड पर हाल ही में लगाए गए नोटिस पर स्थानीय लोग प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं. एक स्थानीय निवासी ने कहा कि हम पिछले तीस साल से यहां रह रहे हैं, लेकिन अचानक नोटिस आने से हम हैरान हैं. वहीं एक दूसरे शख्स ने कहा पहले अधिकारी रिश्वत लेकर कब्जा कर लेते हैं, फिर मकान बनाते हैं और आखिर में मकान ढहाने के नोटिस जारी कर देते हैं. इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए. अगर यह जमीन सिंचाई विभाग की है तो फिर यहां मकान और दुकानें कैसे बनीं? उन्हें क्यों नहीं रोका गया?

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Sami Siddiqui

समी सिद्दीकी उप्र के शामली जिले के निवासी हैं, और 6 से दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे हैं. राजनीति, मिडिल ईस्ट की समस्या, देश में मुस्लिम माइनॉरिटी के मसले उनके प्रिय विषय हैं. इन से जुड़ी सटीक, सत्य ...और पढ़ें

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