)
Jammu Kashmir News Today: जम्मू-कश्मीर में पिछले दो दिनों से हो रही मूसलधार बारिश ने कयामत बरपा दिया है. पूरे प्रदेश में सभी तरह की सरगर्मियों पर रोक लग गई है. तेज बारिश और भूस्खलन ने अब तक 41 लोगों की जान ले ली है. इनमें से ज्यादातर मौतें माता वैष्णो देवी रूट पर हुए भूस्खलन में हुईं. बुधवार (27 अगस्त) को बारिश थमने से राहत कार्यों में थोड़ी तेजी आई, लेकिन हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं.
मौसम विभाग ने बारिश को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं. मौसम विभाग के मुताबिक, जम्मू में 24 घंटे में 380 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 1910 के बाद से सबसे ज्यादा है. झेलम नदी, अनंतनाग और श्रीनगर में खतरे का निशान से ऊपर बह रही है और कई इलाकों में पानी भर गया. प्रशासन ने अब तक 10 हजार से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू कर महफूज जगहों पर पहुंचाया है.
भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने आज यानी जुमेरात (28 अगस्त) को सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का ऐलान किया है. बारी बारिश की वजह से कई जगहों पर रेलवे ट्रैक को मामूली नुकसान पहुंचा है, इसकी वजह से रेलवे विभाग ने 58 ट्रेनें रद्द कर दीं और 64 ट्रेनों को बीच में ही रोक दिया. चक्की नदी क्षेत्र में बाढ़ और मिट्टी धंसने से रेल सेवाएं फिर से बंद करनी पड़ीं.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला खुद श्रीनगर से जम्मू पहुंचे और हालात का जायजा लिया. उन्होंने बताया कि बुधवार को बारिश थमने से थोड़ी राहत मिली है और निचले इलाकों में पानी धीरे-धीरे उतर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारी बारिश और बाढ़ से पैदा हुए भयावह हालात पर चिंता जताई है और मृतक के परिजनों के प्रति शोक संवेदना का इजहार किया.
रेसी जिले में अर्धकुंवारी के पास वैष्णो देवी रूट पर मंगलवार दोपहर भूस्खलन हुआ. इसमें अब तक 34 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें 14 औरतें शामिल हैं. मृतकों की पहचान राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं के रूप में हुई है. दस शवों की पहचान नहीं हो सकी है. करीब 20 घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है. हादसे के बाद यात्रा दूसरे दिन भी बंद रही.
इसके अलावा डोडा जिले में चार लोगों की मौत हुई, जबकि प्रगवाल और अखनूर से दो और शव मिले. कठुआ जिले के लखनपुर में सिंचाई विभाग के कर्मचारी का शव मिला. किश्तवाड़ जिले के मारगी इलाके में बादल फटने से 10 मकान और एक पुल बह गया. हालांकि यहां किसी जनहानि की खबर नहीं है.
श्रीनगर और अनंतनाग के कई रेसिडेंशियल और कॉमर्शियल एरिया में पानी भर गया. अनंतनाग की जिला अदालत परिसर में भी पानी घुस गया, जिसे एसडीआरएफ की टीम ने नाव से खाली कराया. जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे समेत कई सड़कें भूस्खलन की वजह से बंद हैं. हाल ही में 14 अगस्त को किश्तवाड़ के चिसोटी गांव में बादल फटने से मचैल माता यात्रा प्रभावित हुई थी, जिसमें 65 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हुई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
फिलहाल, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक सतर्क रहने की चेतावनी दी है. प्रशासन लगातार बचाव और राहत कार्य चला रहा है, लेकिन भारी तबाही से हालात सामान्य होने में वक्त लग सकता है. अगले कुछ दिनों तक यहां मौसम में उतार चढ़ाव बने रहने की संभावना है. प्रशासन ने लोगों से जरुरत पड़ने पर ही सफर करने की सलाह दी है.