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NIA Raid In Jammu Kashmir: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर सोमवार को दिल्ली आतंकी ब्लास्ट मामले में आठ स्थानों पर समन्वित छापेमारी शुरू की. इस कार्रवाई में मुख्य संदिग्ध जासिर बिलाल वानी के घर पर बड़ी तलाशी शामिल है.
यह ऑपरेशन एक 'व्हाइट कॉलर टेरर' नेटवर्क से जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें कई टीमों के जरिए एक साथ तलाशी ली जा रही है. वानी के घर पर तलाशी अभी भी जारी है.
जासिर बिलाल वानी, जिसे दानिश के नाम से भी जाना जाता है, 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट का अहम सह-साज़िशकर्ता बनकर सामने आया है. राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएट वानी काज़ीगुंड, अनंतनाग का रहने वाला है.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, वानी ने पुलवामा के 28 वर्षीय डॉक्टर नबी के साथ मिलकर हमास शैली के ड्रोन हमलों और छोटे, कच्चे रॉकेट विकसित करने का प्लान बनाया था. जांचकर्ताओं का कहना है कि वानी इस मॉड्यूल का तकनीकी आधार था. उसने ड्रोन को मॉडिफाई किया, उनकी बैटरी और कैमरा सिस्टम को अपग्रेड किया और छोटे विस्फोटक पेलोड तैयार करने की कोशिश की, जिन्हें भीड़भाड़ वाले इलाकों में गिराया जा सके.
NIA का कहना है कि ये डिजाइन मिडिल ईस्ट के संघर्ष क्षेत्रों में हमास और ISIS के जरिए इस्तेमाल की गई रणनीतियों से काफी मेल खाते हैं. वानी की मुलाकात नबी से पिछले साल अक्टूबर में कुलगाम की एक मस्जिद में हुई थी, जहां उसे इस समूह में शामिल किया गया,
शुरुआत में अन्य मेंबर्स चाहते थे कि वानी जैश-ए-मोहम्मद के लिए ओवर-ग्राउंड वर्कर के रूप में काम करे, लेकिन नबी ने कथित रूप से उसे आत्मघाती हमलावर बनने के लिए उकसाया और एक अधिक उग्र भूमिका की ओर धकेला.
अप्रैल 2025 तक वानी ने आर्थिक दबाव और आत्महत्या पर धार्मिक प्रतिबंधों का हवाला देते हुए पीछे हटने की बात कही, हालांकि NIA का मानना है कि वह तकनीकी तैयारी में शामिल रहा.
उसकी गिरफ्तारी अमीर राशिद अली की गिरफ्तारी के बाद हुई है, जिसके नाम पर धमाके में इस्तेमाल की गई i20 कार रजिस्टर्ड थी. अली ने नबी के लिए सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया और अन्य रसद सहायता मुहैया कराई थी.
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