Alim Fazil Degree in Govt Jobs: सरकार के जरिये आलिम-फाजिल डिग्री को सरकारी नौकरियों में मान्यता देने के फैसले से सैकड़ों अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का रास्ता खुल गया है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकारी नौकरियों में आ रही रूकावट अब खत्म हो गई है. इसका फायदा झारखंड के लाखों मदरसा छात्रों को मिलेगा.
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Jharkhand News Today: झारखंड के हजारों आलिम-फाजिल डिग्रीधारक युवाओं को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है. अब उन्हें नौकरी के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा. झारखंड सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन डिग्रियों को सरकारी नौकरियों में मान्यता देकर नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया है. इस फैसले से लंबे समय से संघर्ष कर रहे विद्यार्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई.
राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह कदम शिक्षा और प्रतिभा को बराबरी का मौका देने की दिशा में बेहद जरुरी है. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार का यह फैसला सामाजिक न्याय, समावेश और विकास के प्रति उसकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
गौरतलब है कि आलिम और फाजिल में इस्लामी शिक्षा और अरबी, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी और हिंदी पढ़ाई जाती है. आलिम और फाजिल की डिग्रियां पढ़ाई पूरी करने के बाद मदरसा छात्रों को दी जाती हैं. इसे झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के बराबर माना जाता है. हाल ही में झारखंड में इन डिग्रियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, जिससे कई अभ्यर्थियों की नौकरी की पात्रता प्रभावित हुई थी.
सहायक आचार्य भर्ती 2023 में चयनित आलिम और फाजिल डिग्रीधारियों के दस्तावेजों का सत्यापन रोक दिया गया था और उनकी नियुक्तियां ठप कर दी गई थीं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले (अंजुम कादरी बनाम भारत संघ) का हवाला देते हुए इस डिग्री की मान्यता को अस्वीकार कर दिया गया था. इसमें कहा गया था कि यह डिग्री नियुक्तियों के लिए मान्य नहीं है.
इस फैसले के बाद सैकड़ों सफल उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया था. इसी मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन हिदायतुल्लाह खान ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट की थी. उन्होंने बताया था कि इस फैसले से मुस्लिम समुदाय के छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ेगा. हिदायतुल्लाह खान ने मुख्यमंत्री से आलिम-फाजिल डिग्री की मान्यता बहाल करने के लिए सकारात्मक हस्तक्षेप की गुजारिश की थी.
हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, यह पत्र उच्च शिक्षा मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन को भी भेजा गया था. सरकार के नए फैसले के बाद अब सभी बाधाएं हट गई हैं और आलिम-फाजिल डिग्री को सरकारी नौकरियों में मान्यता मिल चुकी है. इससे अब झारखंड में इस डिग्री के हजारों योग्य छात्र अपने सपनों की नौकरी पाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे.
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