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Protest against Dowry: इस्लाम में दहेज का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है. बल्कि इस्लाम की तारीख और शिक्षाओं को देखे तो हमें पता चलता है कि शादी को आसान बनाने और कम खर्च में शादी करने को सीख दी गई है. इन सब के इतर हर समुदाय की तरह मुस्लिम समुदाय में भी दहेज की प्रथा अपनी जड़े जमा चुकी है. इस बीच झारखंड के लातेहार जिले के सरयू प्रखंड में मुस्लिम समाज के लोगों ने दहेज के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. यह प्रदर्शन रैली के रूप में था, जिसमें सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद थे. खास बात यह है कि इस मुहिम में मुस्लिम समाज के युवकों ने भी भारी तादाद में हिस्सा लिया.
इस प्रदर्शन के जरिए समाज में मैसेज देने की कोशिश की गई कि बेटी को बोझ न समझा जाए. दहेज एक ऐसी सामाजिक समस्या है, जिसकी वजह से गरीब बाप को अपनी बेटियों की शादी में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसी समस्या की वजह से झारखंड के सरयू प्रखंड में प्रदर्शन किया गया, ताकि समाज में गरीब लोगों की बच्चियों की शादी आसानी से हो सके.
इस प्रदर्शन में बेटी बोझ नहीं है, दहेज न लेंगे और न देंगे जैसे स्लोगन वाले पोस्टर दिखे. दहेज के खिलाफ यह विरोध रैली सरयू प्रखंड के जामा-मस्जिद से नीलाम्बर–पीताम्बर चौक तक निकाला गया. इस रैली में शामिल लोगों ने दहेज प्रथा को समाज के लिए शर्मनाक और विनाशकारी बताया. लोगों ने कहा कि दहेज से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और असहाय परिवारों को होता है.
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि उनकी टीम सरयू प्रखंड के इलाके में लंबे समय से दहेज के खिलाफ अभियान चला रही है और दहेज का पूर्ण बहिष्कार की मांग करती है. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि बेटियां घर की इज्जत हैं, कोई सौदा नहीं. लोगों ने कहा कि शादी में दहेज मांगने वाले और देने वाले दोनों समाज के अपराधी हैं. लोगों ने कहा कि यह बदलाव की शुरुआत है कि आज हमारी युवा पीढ़ी खुद आगे आकर दहेज़ का विरोध कर रही है.