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Jammu Kashmir News Today: केंद्रीय राजधानी दिल्ली में 10 सितंबर को देर शाम हुए कार ब्लास्ट को याद लोग अभी भी सिहर उठते हैं. इस घटना के बाद जांच एजेंसियों ने ताबड़ तोड़ कार्रवाई करते हुए देश के कोने-कोने से कई लोगों को गिरफ्तार किया है. इस दौरान जांच एजेंजियों ने शक के आधार कई लोगों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया.
कार ब्लास्ट केस के कई आरोपियों का कनेक्शन जम्मू कश्मीर से सामने आया है. इसके बाद कई दक्षिणपंथी संगठन ने वावेला खड़ा कर दिया. कई जगहों पर जम्मू कश्मीर के लोगों को डराया धमकाया जा रहा है. लगातार इस तरही घटनाएं सामने आने के बाद सोमवार (17 नवंबर) को जम्मू कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन (JKSA) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
JKSA का कहना है कि ब्लास्ट के बाद देशभर में कश्मीरी छात्रों को शक की निगाहों से देखा जा रहा है. उनसे पूछताछ किया जा रहा है, इसकी वजह से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जेकेएसए ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस मामले में देश के प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए, क्योंकि जिस तरह एक पूरी कश्मीरी कम्युनिटी को एक लाइन में खड़ा किया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है. संगठन ने बताया कि देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले कश्मीरी लोगों को लगातार परेशान किया जा रहा है, तलाशी ली जा रही है और कई जगह सम्मन भेजे जा रहे हैं.
JKSA ने प्रेस कॉन्फ्रेंस गृहमंत्री से भी अपील की कि जांच निष्पक्ष हो और जो भी दोषी हों उन्हें ऐसी सजा दी जाए, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखें, लेकिन जांच की आड़ में निर्दोष लोगों को परेशान न किया जाए. उन्होंने कहा कि जिन छात्रों का इस मामले से कोई संबंध नहीं है, उन्हें भी इस ब्लास्ट से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसकी वजह से छात्रों में डर का माहौल है.
संगठन ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में हरियाणा के गुरुग्राम से लगभग 700 से ज्यादा कश्मीरी छात्रों को जबरन वापस कश्मीर भेजा गया. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों में पढ़ रहे छात्रों को भी लगातार परेशान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद जो गलत नैरेटिव कश्मीर को लेकर बनाया गया था, उसकी वजह से भी छात्र डरे और सहमे हुए हैं.
दिल्ली धमाके के बाद डरे हुए छात्रों और समुदाय की चिंता को लेकर JKSA ने प्रधानमंत्री को एक विस्तृत चिट्ठी भी भेजा है. चिट्ठी में उन्होंने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए लिखा कि यह हमला सिर्फ राजधानी पर नहीं बल्कि पूरे देश की भावनाओं पर गहरी चोट थी. कश्मीर के लोग भी उतने ही दुखी हैं जितना देश के बाकी लोग. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों का दर्द कश्मीर का भी दर्द है.
JKSA ने कहा कि कश्मीरी छात्र भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों पर पूरा भरोसा रखते हैं और कभी अलगाववाद या हिंसा के समर्थन में नहीं रहे. कश्मीर के लोगों ने हमेशा देश की सेवा की है. संगठन ने कहा कि आज का कश्मीरी नौजवान खेल, टेक्नोलॉजी, तालीम, सियासत और साइंस समेत हर क्षेत्र में देश का नाम रौशन कर रहा है.
'कश्मीर के लोगों को सुरक्षा, सम्मान और बराबरी की है जरुरत'
चिट्ठी में प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना (PMSSS) का भी जिक्र किया गया, जो हजारों कश्मीरी छात्रों के लिए देशभर के कॉलेजों में पढ़ने का जरिया बना. संगठन ने कहा कि यह योजना कश्मीर और बाकी भारत के बीच बड़ा पुल बनी है, लेकिन छात्रों को सिर्फ मौका ही नहीं बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बराबरी की भी जरूरत है.
JKSA ने कहा कि धमाके के बाद देशभर में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों में डर का माहौल है. कई को प्रोफाइलिंग, पूछताछ और अचानक जांच का सामना करना पड़ा है. कई छात्र क्लास, एग्जाम, लैब और इंटर्नशिप छोड़कर कश्मीर लौट आए हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें गलत तरीके से मामले में घसीटा जा सकता है. उन्होंने जोर दिया कि उन्हें जांच एजेंसियों की क्षमता पर पूरा भरोसा है, लेकिन जांच निष्पक्ष और संवेदनशील होनी चाहिए, ताकि निर्दोष छात्रों को सामूहिक सजा न मिले.
'कश्मीरियों को शक की निगाह से न देखा जाए'
JKSA ने मांग की कि प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दिलाएं कि कश्मीरी छात्र भी भारत के समान नागरिक हैं और उन्हें वही अधिकार और सुरक्षा मिलेगी जो अन्य नागरिकों को मिलती है. JKSA ने सरकार से यह भी मांग की कि देशभर के कॉलेजों और पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि किसी भी छात्र के साथ भेदभाव, डराने या गलत व्यवहार की कोई गुंजाइश न रहे. उन्होंने कहा कि असली अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा होनी चाहिए.
चिट्ठी के अंत में संगठन ने कहा कि हजारों कश्मीरी छात्र देश के अलग-अलग हिस्सों में अपना दूसरा घर बना चुके हैं और दोस्ती व भाईचारे की मिसाल पेश कर रहे हैं. इसलिए उन्हें उन घटनाओं के लिए शक की नजर से न देखा जाए जिनसे उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि राष्ट्र की असली ताकत अपने नागरिकों के प्रति सम्मान और भरोसे में होती है.