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JMI Foundation Day: जामिया मिलिया इस्लामिया यह एक यूनिवर्सिटी नहीं बल्कि एक विचार, एक संघर्ष और एक विरासत का प्रतीक है. इस यूनिवर्सिटी से कई मश्हूर हस्तियों ने पढ़ाई की है. आज जामिया मिलिया इस्लामिया का स्थापना दिवस है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जामिया की शुरुआत किसी बड़ी और आलीशान इमारत में नहीं हुई थी, बल्कि एक छोटे से कमरे से इसकी शुरुआत हुई और वजह देश की आजादी बनी.
साल 1920 के दौरान देश आज़ादी की लड़ाई में डूबा हुआ था और ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज़ें तेज़ हो रही थीं. उस दौर में अलीगढ़ के कुछ शिक्षक और विद्यार्थी चिंतित थे कि ब्रिटिश सरकार शिक्षा पर अपना कंट्रोल और दबाव बढ़ा रही है. वे ऐसी शिक्षा चाहते थे जो आज़ादी, नेशनलिज्म और भारतीय मूल्यों से प्रेरित हो.
इसी सोच से जामिया मिलिया इस्लामिया की नींव रखी गई. इसे बनाने वाले चाहते थे कि यूनिवर्सिटी को ऐसा बनाया जाए जो अपने पैरों पर खड़ी हो, अपने सिद्धांतों पर चले और समाज के हर वर्ग को शिक्षा का समान अवसर दे.
जामिया के संस्थापक मौलाना मोहम्मद अली जौहर, हकीम अजमल खान, डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी और अब्दुल मजीद ख्वाजा थे. इस आंदोलन को दिशा, दृष्टि और संकल्प देने वाले नेताओं में से एक थे महमूद हसन देवबंदी. बाद में डॉ. जाकिर हुसैन, जो आगे चलकर भारत के राष्ट्रपति बने, ने जामिया की पहचान को आकार देने में अहम भूमिका निभाई.
ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के अनुसार, जामिया मिलिया इस्लामिया ने भारत की आज़ादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. 1925 में जामिया को अलीगढ़ से दिल्ली के करोल बाग लाया गया. उस समय स्थान छोटा था और संसाधन सीमित थे, लेकिन जामिया का दृष्टिकोण मज़बूत था. फिर 1935 में जामिया को उसका स्थायी ठिकाना ओखला में मिला, जहां आज यह विश्वविद्यालय 239 एकड़ में फैला हुआ है.
1962 में जामिया को युनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन से मान्यता प्राप्त हुई और 26 दिसंबर 1988 को संसद के एक अधिनियम के तहत इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया. आज जामिया मिलिया इस्लामिया सिर्फ एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, समरसता और शिक्षा के मूल्यों पर टिका एक ऐतिहासिक प्रतीक बन चुका है.
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