JNU students Union Election 2025 Result: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ चुनाव में इस बार चारों सीटो पर लेफ्ट गठबंधन की जीत हुई है. जॉइंट सेक्रेटरी पर मुस्लिम छात्रा दानिश अली ने ABVP के अनुज को पछाड़ कर जीत दर्ज की है. वहीँ, बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर के दृष्टिबाधित छात्र मोहम्मद असलम और हफ़सा बुखारी नाम की एक छात्रा ने पार्षद का चुनाव जीता है.
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JNU students Union Election 2025 Result: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ के चुनाव के नतीजे गुरुवार की शाम को जारी कर दिए गए. इस बार लेफ्ट दलों ने ABVP को पछाड़ते हुए प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, जनरल सेक्रेटरी,और जॉइंट सेक्रेटरी जैसे सभी महत्वपूर्ण पदों पर कब्ज़ा कर लिया है. प्रेसिडेंट पद पर अदिति मिश्रा, वाइस प्रेसिडेंट पर के गोपिका, जनरल सेक्रेटरी पर सुनील यादव और जॉइंट सेक्रेटरी पर दानिश अली ने जीत दर्ज की है. इनमें दृष्टिबाधित छात्र असलम आलम और छात्रा हफ़सा बुखारी ने भी पार्षद के पर पर जीत दर्ज की है. ख़ास बात ये है कि लेफ्ट पार्टी से दो- दो मुस्लिम लड़कियों ने JNU छात्र संघ का चुनाव जीता है.
4 नवंबर को हुए इन चुनावों में छात्रों ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव के साथ-साथ अलग- अलग संकाय पार्षद पदों के लिए भी वोट डाले थे.
कौन हैं दानिश अली ?
दानिश अली मध्य प्रदेश के नरसिंह पुर की रहने वाली हैं. वह JNU के सेंटर फॉर हिस्टॉरिकल स्टडीज में शोधार्थी हैं. दानिश अली के पिता सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और मां एक सरकारी स्कूल की प्रधानाचार्य हैं. दानिश ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से इतिहास में ग्रेजुएशन किया है. 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान DU छात्रों को लामबंद करने में दानिश अली से ख़ासा रोल निभाया था. JNU में दानिश लंबे अरसे से समानता, सामाजिक न्याय और सामंती हिंसा के विरोध की राजनीति से जुड़ी रही हैं.
बिहार से है असलम का ताल्लुक
असलम बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर के निवासी हैं. असलम फ़िलहाल जेएनयू (JNU) में पीएचडी स्कॉलर हैं, और लगातार छात्रों के हक़, नीतिगत नाइंसाफी, और भारत व जेएनयू की लोकतांत्रिक भावना के लिए जद्दो जेहद कर रहे हैं. वह फिलिस्तीन की आज़ादी के कट्टर हिमायती हैं, और इज़राइल द्वारा किए जा रहे जुल्म- ज्यादती के खिलाफ कई विरोध-प्रदर्शनों का हिस्सा रह चुके हैं. मोहम्मद असलम अब स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ से काउंसलर पद की जिम्मेदारी निभाएंगे. वह प्रतिरोध, शिक्षा, समानता और स्वतंत्रता की आवाज का प्रतिनिधित्व करते हैं.
कामरेड असलम बचपन से इन्साफ के लिए लड़ने का जज़्बा रखने वाले और शिक्षा से क्रांति लाने के हिमायती हैं.
2007 में उन्होंने इस सपने के साथ पढाई शुरू की थी कि इल्म इंसानों की ज़िंदगी बदल सकती है. दृष्टिबाधित होने के बावजूद असलम की सफ़र बेहद प्रेरणादायक रहा है. रांची में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से मुलाक़ात से लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई के दौरान जुल्म और ज्यादती के खिलाफ आवाज उठाने तक, असलम ने हर कदम पर लोकतांत्रिक सिद्धांतों का साथ दिया है.
इससे पहले पांडिचेरी विश्वविद्यालय में भी उनका संघर्ष जारी था. वहां उन्होंने प्रशासनिक दबाव के खिलाफ आंदोलन की रहनुमाई की थी.
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