Eid Ul Adha 2025 in India: देश में ईद-उल-अजहा की जोरशोर से तैयारी चल रही है. हालिया घटनाओं को देखते हुए शांतिपूर्वक त्यौहार संपन्न कराने को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद की मुजफ्फरनगर में बैठक हुई. इसमें कई मुद्दों पर चर्चा की गई. इसके अलावा इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने ईद-उल-अजहा से जुड़े मसलों को जानने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.
Trending Photos
)
Uttar Pradesh News Today: इस साल देश भर में ईद-उल-अजहा का त्यौहार 7 जून को मनाया जाएगा. उससे पहले बाजारों में रौनक बढ़ गई है, बड़ी संख्या में लोग कुर्बानी का जानवर खरीदने के लिए बाजारों का रुख कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश में ईद-उल-अजहा के त्यौहार शांतिपूर्वक ढंग से संपन्न कराने को लेकर मुस्लिम संगठन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहे हैं.
इसी सिलसिले में मुजफ्फरनगर में जमीयत उलमा-ए-हिंद की अगुवाई में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया. अंबा विहार स्थित मदरसा चिरागिया में हुई इस बैठक में जिले भर से उलेमा और मुस्लिम संगठन के पदाधिकारियों ने शिरकत की. इस बैठक में संगठन की मजबूती, ईद-उल-अजहा की तैयारियों के साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर गहन विचार विमर्श हुआ.
इस मौके पर मुजफ्फरनगर जिले के जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना मुकर्रम कासमी ने ईद-उल-अजहा पर प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी ना करने और धार्मिक मर्यादाओं का ध्यान रखने की खास अपील की. जमीयत उलमा-ए-हिंद की वर्किंग कमेटी की अहम बैठक जिला अध्यक्ष मौलाना मुकर्रम अली कासमी की अध्यक्षता में संपन्न हुई.
मौलाना मुकर्रम कासमी ने कहा कि प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी ना की जाए, कुर्बानी को पर्दे में अदा किया जाए और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करने से बचा जाए. इस दौरान बैठक में संगठन की मजबूती और आमजन को इससे जोड़ने पर भी खास चर्चा हुई. बैठक में जिले भर के प्रमुख उलेमा और कार्यकर्ता मौजूद रहे.
ईद-उल-अजहा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
लखनऊ स्थित इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने ईद-उल-अजहा को लेकर हेल्पलाइन नंबर जारी किया है. इन नंबरों पर कॉल करके इस्लाम और कुर्बानी से जुड़े हुए शंकाओं पर सवाल जवाब किया जा सकता है. यह हेल्पलाइन 29 मई से 10 जून तक जारी रहेगी. कुर्बानी, हज, ईद-उल-अजहा समेत दूसरे दीनी मसले जानने के लिए जारी नंबरों कॉल या व्हॉट्सऐप या फिर ईमेल के जरिये कॉन्टैक्ट किया जा सकता है. हज पर गए लोगों के लिए खास हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं.
ये भी पढ़ें: हरदोई में अब कब्रिस्तान पर चला चाबुक; मुस्लिम सालों से लाश करते थे दफन!