UP Madarsa News: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की लगातार मदरसों पर सख्ती से कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं. कानपुर में हालिया दिनों कई मदरसों ने अपनी मान्यता सरेंडर कर दी है. मदरसा संचालकों ने इसको लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
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Uttar Pradesh News Today: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार लगातार मदरसों के खिलाफ सख्ती बरत रही है, इसकी वजह से कई मदरसा संचालक लगातार मान्यता सरेंडर कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि सरकार की सख्ती की वजह से मानक विहीन मदरसों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. इसकी वजह से मदरसा संचालकों में कार्रवाई का डर पैदा हो गया है.
सरकारी कार्रवाई के डर से कई मदरसा संचालकों ने मान्यता सरेंडर कर दिया है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हालिया कुछ दिनों में 12 मदरसा संचालकों ने मान्यता सरेंडर करने के लिए आवेदन दिया है. केंद्र और प्रदेश सरकार ने मदरसों को मॉर्डनाइज्ड करने के लिए कई तरह की स्कीमें चलाने का दावा कर रही हैं, इसके उलट मदरसा संचालक सरकार पर मदद न करने का आरोप लगा रहे हैं.
सरकार का दावा है कि वह मदरसों में दीनी तालीम के नाम पर खुले मदरसों में माडर्न एजुकेशन भी शुरू करेगी, जिससे मदरसा छात्रों को रोजगारपरक शिक्षा दी जा सके. इसके लिए कई स्कीमें शुरू की गई हैं. सरकार के जरिये हाल में की गई घोषणा के मुताबिक, मदरसा छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की भी जानकारी देने का ऐलान किया है.
हालांकि अब मदरसा संचालकों के जरिये सरेंडर करने पर प्रदेश सरकार के दावों पर सवाल खड़े होने लगे हैं. मदरसा संचालकों ने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने किए वायदे ने पूरी नहीं किए हैं. उन्हें जब सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है तो ऐसे में वह मान्यता का क्या करेंगे? मान्यता सरेंडर करने के बाद अब वह किसी सरकारी नियम से बंधे नहीं हैं.
गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने क्लास 1 से 3 तक मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य कर दी हैं. यू डाइस पोर्टल पर छात्रों और टीचर का डाटा अपलोड करने की व्यवस्था को लेकर मदरसा संचालकों में काफी नाराजगी है. ऑनलाइन जानकार अपलोड करने से मदरसों में छात्रों की संख्या में फर्जीवाड़ा नहीं हो पाता है.
मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कुल 23 हजार 500 से अधिक मदरसे हैं, जिनमें से 16 हजार 513 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं. इसके अलावा 800 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं. इनमें से 560 मदरसों को सरकारी सहायता मिलती है. इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2024 में बने यूपी सरकार के कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जिससे मदरसों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए थे.
हालांकि बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने के फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मदरसों के फेवर में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के सभी मदरसों को संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त हुई है, जो उनकी तालीमी आजादी और अधिकारों को सुनिश्चित करती है. अब मदरसा संचालकों के जरिये मान्यता सरेंडर करने पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
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