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Delhi Riots 2020 Court Verdict: साल 2020 में हुए दिल्ली दंगों के मामले में जेल में कैद 6 बेकसूर मुस्लिम युवकों को दिल्ली के कुकुर डूमा कोर्ट ने बिना शर्त रिहा कर दिया है. कड़कड़डूमा कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम समाज में खुशी की लहर है. हालांकि कई लोग यह सवाल भी पूछ रहे हैं कि इन मुस्लिम युवकों को बिना सबूत 5 सालों तक जेल में रखा गया और फिर रिहा किया गया, इतने दिनों तक जेल में रहने और जिल्लत झेलने का हर्जाना कौन पूरा करेगा? साथ ही लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि क्या बिना सबूत गिरफ्तार करने और जेल में कैद करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी?
आज यानी 27 नवंबर को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 6 मुस्लिम युवकों को दिल्ली दंगा मामले में रिहा कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि इन युवकों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं पाया गया, जिससे इन्हें दोषी माना जाए. दिल्ली पुलिस इन युवकों के खिलाफ कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई, जिसके बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने जिन मुस्लिम युवकों को रहा करने का आदेश दिया है उनके नाम गुलज़ार, शहज़ाद, वाजिद, साजिद, शहबाज़ और सलीम है.
दिल्ली पुलिस ने इन मुस्लिम युवकों पर आरोप लगाया था कि ये युवक दिल्ली दंगे के दौरान लूटपाट और घरों में आगजनी की थी. हालांकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट में ये आरोप साबित नहीं हुए. कोर्ट ने कहा कि सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बिना शर्त बाइज्जत बरी किया जाता है. वहीं, कोर्ट के इस फैसले के बाद इन मुस्लिम युवकों के परिवार के लोगों ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रेसिडेंट मौलाना महमूद असद मदनी को बधाई दी और शुक्रिया कहा.
इन मुस्लिम युवकों के परिवार वालों ने जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के प्रेसिडेंट मौलाना महमूद असद मदनी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि जमीयत की टीम ने पिछले पांच सालों में पूरा सहयोग किया, नहीं तो उन्हें बहुत निराशा होती. परिवार ने कोर्ट का भी शुक्रिया अदा किया. बता दें कि जमीयत की टीम दिल्ली दंगों से जुड़े 600 मामलों में जमानत हासिल कर चुकी है और 267 मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ रही है. साथ ही जमीयत की टीम ने दिल्ली दंगों में प्रभावित घरों, दुकानों की मरमत और पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद भी की है.