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कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण पर बवाल, अब विधेयक पहुंचा राष्ट्रपति के दरबार, जानें मामला?

Muslim Reservation in Karnataka: कर्नाटक में हालिया दिनों सिद्धरमैया सरकार ने मुस्लिम समुदाय को आरक्षण देने का ऐलान किया है. इसको प्रदेश विधानमंडल से मंजूरी मिलने के बावजूद अभी यह राज्यपाल के पास अटका हुआ था. बीजेपी के भारी विरोध के बीच अब इस विधेयक को राज्यपाल ने दिल्ली भेज दिया है. जानें पूरा मामला?  

 

कर्नाटक राज्यपाल थावरचंद गहलोत
कर्नाटक राज्यपाल थावरचंद गहलोत

Karnataka News Today: कर्नाटक सरकार ने हालिया दिनों मुस्लिम समुदाय को सरकारी ठेकों में चार फीसदी आरक्षण देने के लिए विधानसभा में एक विधेयक पारित किया था. प्रदेश की सिद्धरमैया सरकार के जरिये पारित यह विधेयक लंबे समय से अटका पड़ा था, हालांकि इसे अब राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मंजूरी के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया है. इस विधेयक को छिड़ी रार पर अब कुछ हद तक विराम लगता हुआ दिखाई पड़ रहा है. 

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुस्लिम आरक्षण विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजते हुए कहा कि वह अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करते हुए इसे राष्ट्रपति को भेज रहे हैं. इसको लेकर थावरचंद गहलोत ने एक नोट भी लिखा. इसमें उन्होंने कहा कि संविधान धर्म आधारित इस तरह के आरक्षण की इजाजत नहीं देता है. हालांकि भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद के नेता और पदाधिकारी लगातार इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं और इसे मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करार दे रहे हैं.

आरक्षण विधेयक खास?

राज्यपाल थावरचंद गहलोत के जरिये विधेयक दिल्ली भेजे जाने पर अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर टिकी हैं. कर्नाटक की सिद्धरमैया की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने पिछले महीने कर्नाटक ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रोक्योरमेंट्स एक्ट संशोधन को मंजूरी दी थी. जिसे विधानसभा ने भी मंजूरी दे दी थी. हालांकि, राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने असहमति जताई थी. जिसके बाद यह विधेयक अटक गया था. इस विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक, 2 करोड़ रुपये तक के सिविल वर्क और एक करोड़ रुपये तक के गुड्स या सर्विसेस के कामों में मुस्लिम समुदाय को चार फीसदी आरक्षण दिया गया है.
 
हिंदुस्तान में छपी खबर के मुताबिक, राज्यपाल थावरचंद गहलोत इस विधेयक को ऐसे वक्त में राष्ट्रपति के पास भेजा है, जब राज्यपाल के 'पॉकेट वीटो' को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया था. इसको लेकर तमिलनाडु सरकार ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. जब तमिलनाडु के राज्यपाल ने रवि के जरिये रोके गए 10 बिलों को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी. इसके बाद केंद्र की बीजेपी सरकार के जरिये असंवैधानिक करार दिए जा रहे विधेयक को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राट्रपति के पास भेज दिया है. 

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बीजेपी- वीएचपी का भारी विरोध 

प्रदेश के कांग्रेस सरकार के इस फैसला का भारतीय जनता पार्टी विरोध क रही है. इस विधेयक खिलाफ राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया था. बीजेपी नेता इसे मुस्लिम तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करार दे रहे हैं. विश्व हिंदू परिषद ने भी सिद्धरमैया सरकार और मुस्लिम आरक्षण विधेयक की आलोचना करते हुए जोरशोर से प्रदर्शन किया था. वीएचपी ने धमकी दी थी कि धर्म आधारित यह आरक्षण पूरी तरह अस्वीकार्य है. 

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