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Karnataka News Today: कर्नाटक हाईकोर्ट मशहूर मैसूर दशहरा के उद्घाटन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. कर्नाटक हाईकोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य सरकार के मैसूर दशहरा के उद्घाटन को लेकर किए फैसले को चुनौती दी गई थी. कोर्ट के इस फैसले की अब जमकर सराहना हो रही है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है.
मिली जानकारी के मुताबिक, सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने और भारत की गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करने के मकसद से मशहूर लेखिका बानू मुश्ताक़ को कर्नाटक सरकार ने मैसूर दशहरा समारोह का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया था. यह सुनते ही दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग भड़क गए. उन्होंने यह कहते हुए विरोध दर्ज कराया था कि दूसरे धर्म की महिला को समारोह में बुलाना सही नहीं है और यह उनके अधिकारों का उल्लंघन है.
हालांकि, कोर्ट ने सुनवाई के बाद साफ निर्देश दिया कि "किसी दूसरे धर्म के शख्स को समारोह का उद्घाटन करने के लिए बुलाना याचिकाकर्ताओं के कानूनी या संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं है. हमें यह बात मानने की कोई वजह नहीं दिखाई पड़ती है." हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब मैसूर दशहरा समारोह का उद्घाटन बानू मुश्ताक के हाथों होने का रास्ता साफ हो गया.
बता दें, मैसूर जिला प्रशासन ने 3 सितंबर को ऑफिशियली से मशहूर लेखिका बानू मुश्ताक को मैसूर दशहरा के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया था. इसकी खबर मिलते ही दक्षिणपंथी संगठनों के साथ भारतीय जनता पार्टी के नेता विरोध करने लगे. उन्होंने आरोप लगाया था कि बानू मुश्ताक का चयन परंपराओं और धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है.
यह विवाद तब और बढ़ गया जब बानू मुश्ताक का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो में उन्होंने कन्नड़ भाषा की देवी भूवनेश्वरी की पूजा को लेकर बयान दिया था. उनके बयान पर विरोध करते हुए दक्षिणपंथी संगठनों ने दावा किया था कि उनके बयान से हिंदू संस्कृति का अपमान हुआ है.
भारतयी जनता पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि दशहरा की शुरुआत हमेशा वैदिक मंत्रोच्चार और देवी चामुंडेश्वरी की पूजा से होती है. ऐसे में किसी ऐसे शख्स को आमंत्रित करना उचित नहीं है, जिसने धार्मिक आस्थाओं पर सवाल उठाए हैं. बीजेपी नेताओं ने यह भी मांग की कि बानू मुश्ताक पहले यह स्पष्ट करें कि वे देवी चामुंडेश्वरी के प्रति श्रद्धा रखती हैं या नहीं. उनका कहना है कि परंपराओं का सम्मान होना चाहिए और धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं किया जाना चाहिए.
मीडिया में छपी खबरों मुताबिक, इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए बानू मुश्ताक ने कहा कि उनके पुराने बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके बयान के चुनिंदा हिस्से वायरल कर उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने साफ किया कि उनका मकसद किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था.
कब है मैसूर दशहरा उत्सव?
इस बीच मैसूर दशहरा उत्सव की तैयारियां जोर शोर से शुरू हो गई हैं. यह उत्सव 22 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्तूबर (विजयादशमी) को खत्म होगा. उद्घाटन के दिन परंपरागत तरीके से चामुंडी हिल्स स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर में देवी की मूर्ति पर फूल चढ़ाकर समारोह की शुरुआत की जाएगी. कोर्ट के फैसले के बाद दक्षिणपंथियों को करारा जवाब मिला है.