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Karnataka News Today: पूरे भारत में इस सयम कुछ सियासी दल और दक्षिणपंथी संगठन सत्ता हासिल करने और बने रहने के लिए मुसलमानों को खिलाफ लगातार जहर उगल रहे हैं. कई प्रदेश में मुसलमानों के मस्जिद, मदरसे, मजार और धार्मिक स्थलों को सरकार के आदेश पर अवैध बताते हुए ढहाया जा रहा है. मुसलमानों के खिलाफ नफरत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि असम की सत्तारूढ़ पार्टी ने अपनी पार्टी के ऑफिशियल हैंडल से विवादित विज्ञापन पोस्ट किया है. इस पर कोर्ट ने कड़ी फटकार भी लगाई है.
हालांकि, इस सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले लोगों के मंसूबों पर अक्सर पानी फेरने की तस्वीरें भी सामने आती हैं. इसी तरह की एक तस्वीर कर्नाटका से सामने आई है, जहां पर साल 2022 में भी कई संगठनों ने हिजाब को लेकर मुस्लिम औरतों को टार्गेट किया था. इन सबके बावजूद कर्नाटक के रामनगर जिले से गंगा-जमुनी तहजीब की एक खूबसूरत मिसाल सामने आई है.
रामनगर जिले में मुस्लिम समाज के नेता सैयद उल्लाह सखाफ ने अपने निजी खर्च से चन्नपटना के मंगलवारपेट इलाके में स्थित श्री बसवेश्वर स्वामी मंदिर का नए सिरे से निर्माण कराया है. उनका यह कदम धार्मिक सौहार्द और एकता की शानदार मिसाल पेश करता है. जिसकी हर समुदाय के लोग खुले दिल से तारीफ कर रहे हैं.
कन्नड़ राज्योत्सव के मौके पर मंगलवारपेट में श्री बसवेश्वर स्वामी मंदिर का उद्घाटन किया गया. यह भव्य, दिव्य और नव्य मंदिर पूरी तरह पत्थरों से बनाया गया है. मंदिर के उद्घाटन से पहले तीन दिनों तक अन्न दशहरा सहित धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जो सोमवार को खत्म हुआ. उद्घाटन समारोह में भारी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय निवासी शामिल हुए.
मंदिर निर्माण के लिए दान देने वाले एस. के. समूह के मालिक सैयद उल्लाह सखाफ को इस कार्यक्रम में चीफ गेस्ट के रुप में आमंत्रित किया गया था. इस मौके पर श्री बसवेश्वर विनायक युवा समूह की अध्यक्षता में विद्वान नागेंद्र शास्त्री, मंजूनाथ आराध्य और उनके साथियों ने पूजा-अर्चना की अगुवाई की. मंदिर के पुजारी महादेव के पुत्र चंदन, महेश और मनोज ने मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रमों के संचालन की जिम्मेदारी निभाई.
ईटीवी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लगातार हिंदू मुस्लिम में के बीत पैदा किए जा रहे तनाव के बीच इस मंदिर का उद्घाटन हुआ है, जो देश के लोगों को शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व का संदेश दे रहा है. यह मंदिर हिंदू-मुस्लिम एकता की निशानी बन गया है. सैयद उल्लाह सखाफ इससे पहले भी संतहे मोगेनाहल्ली में वीरभद्रेश्वर मंदिर बनवाकर अपनी उदारता और सामाजिक सौहार्द का परिचय दे चुके हैं. उन्होंने उसी परिसर में एक मंदिर और एक मस्जिद दोनों बनवाकर इंसानियत की अनोखी मिसाल पेश की थी.
सैयद उल्लाह सखाफ ने कहा, "अगर हम अच्छा काम करेंगे, तो हमारे बच्चे भी अच्छे होंगे. हिंदू मंदिरों में पूजा करते हैं और मुसलमान मस्जिदों में नमाज़ पढ़ते हैं, ताकि सब सुखी और शांत रहें. हिंदू और मुसलमान का साथ रहना जरूरी है. अगर हम भाई-बहन की तरह साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे, तो देश की तरक्की होगी. अगर हम हर बात पर लड़ते रहेंगे, तो हमारी और देश दोनों की तरक्की रुक जाएगी. हमें सबका सम्मान करना चाहिए."