Congress Action Karnataka Muslim Leaders: कर्नाटक में कांग्रेस आलाकमान के जरिये दो मुस्लिम नेताओं पर कार्रवाई के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है. मुस्लिम उलेमा और सामाजिक संगठनों ने इसे दोहरा मापदंड बताते हुए विरोध जताया है. उनका आरोप है कि बिना नोटिस कार्रवाई की गई, जिससे मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ रही है. उन्होंने कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे से हस्तक्षेप की मांग की है.
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Karnataka News Today: देश के कई हिस्सों में मुसलमानों को लेकर बढ़ती घटनाओं और तनाव के बीच कर्नाटक से एक नया विवाद सामने आया है, जिसने समुदाय के भीतर बेचैनी और असंतोष को और बढ़ा दिया है. कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने हालिया दिनों दो प्रमुख मुस्लिम नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की, इस कार्रवाई को लेकर मुस्लिम उलेमा और समुदाय के लोगों में नारजगी बढ़ गई.
पूरा मामला कर्नाटक के जद नगीरे सिमीली क्षेत्र के उपचुनाव से जुड़ा है, जहां मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिए जाने के बाद पार्टी के अंदर काफी नारजगी पैदा हो गई थी. इस बीच आंतरिक विरोध और कथित अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते पार्टी ने विधान परिषद सदस्य अब्दुल जब्बार और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव नसीर अहमद के खिलाफ कार्रवाई की.
इस कार्रवाई ने मुस्लिम समुदाय के बीच और ज्यादा नाराजगी पैदा कर दी है. कर्नाटक के मुस्लिम उलेमा और सामाजिक संगठनों ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि बगैर वजह बताओ नोटिस दिए ही मुस्लिम नेताओं पर कार्रवाई करना उचित नहीं है.
"उलेमा-ए-कर्नाटक" के बैनर तले मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी ने सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया. उनका आरोप है कि अब्दुल जब्बार को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया और उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी हटा दिया गया. वहीं, नसीर अहमद को अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया.
उलेमा ने सवाल उठाया कि बिना किसी नोटिस के इस तरह की कार्रवाई का क्या औचित्य है. उन्होंने एक बयान में कहा कि नसीर अहमद हमेशा अल्पसंख्यकों, पिछड़ा वर्ग और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अगुवाई वाली सरकार के बीच एक अहम कड़ी रहे हैं. उनकी बर्खास्तगी और अब्दुल जब्बार का इस्तीफा अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर मुसलमानों के लिए एक नकारात्मक संकेत है.
बयान में यह भी कहा गया कि इस तरह के कदम पिछड़े वर्गों की जायज मांगों के प्रति संवेदनहीनता को दिखाते हैं. साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मांग की गई है कि वे इस मामले का संज्ञान लें और कर्नाटक में अल्पसंख्यकों के साथ हो रही इस तरह के हालात पर ध्यान दें.