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Jammu and Kashmir: जम्मू व कश्मीर के नेता मीरवाइज उमर फारूक ने रविवार को कहा है कि जम्मू व कश्मीर के मुसलमान चाहते हैं कि कश्मीरी पंडित कश्मीर में वापस आएं. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा इंसानी है न कि राजनीतिक.
न्यूज एजेंसी IANS से बात करते हुए मीरवाइज उमर फारूक ने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी है. उन्होंने कश्मीर के सबसे लंबे वक्त के विवाद में रहे मुद्दे और वक्फ संशोधन बिल पर अपनी बात रखी. उन्होंने वक्फ संशोधन बिल पर चिंता जाहिर की. उनके मुताबिक वक्फ संशोधन बिल मुसलमानों के हितों के खिलाफ है. यहां पर उन सवालों के जवाब हैं, जो मीरवाइज से पूछे गए हैं.
सवाल: आपने कश्मीरी पंडित के डेलीगेशन से मुलाकात की है. क्या आप उस बारे में बात करना चाहेंगे?
मीरवाइज: कश्मीरी पंडितों का मुद्दा इंसानी है, न कि राजनीतिक. कश्मीर के मुसलमान चाहते हैं कि कश्मीरी पंडित अपने घरों को वापस लौटें. हमने दिल्ली में कश्मीरी पंडितों से मुलाकात की और इसके बारे में बात की. हमने जामा मस्जिद में खुलेआम कहा है कि कश्मीरी पंडितों के लौटने के लिए हम पूरा सपोर्ट करेंगे.
उन्होंने आगे कहा कि कश्मीरी पंडितों को कुछ कदम उठाने की जरूरत है. एक कमेटी बनाने का सुझाव दिया गया है जिस पर हम आगे सोचेंगे और उसी हिसाब से कदम उठाएंगे. हम कश्मीरी पंडितों को वापस लाने के लिए पहल करेंगे. कश्मीरी पंडितों और मुसलमानों के दरमियान पहले जो प्यार और भाईचारा था, उसे दोबारा बनाया जाएगा.
सवाल: आप कश्मीर के मौजूदा हालात पर क्या सोचते हैं?
मीरवाइज: हम सभी कश्मीर के मौजूद हालात को देख सकते हैं. सबकुछ साफ है, कुछ छिपा नहीं है. हम हमेशा से इस बात पर यकीन रखते हैं कि कश्मीर के मुद्दे को बातचीत से हल किया जा सकता है. मुद्दा बहुत पुराना है और इसे सिर्फ बातचीत से हल किया जा सकता है.
सवाल: लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश किया जाना है. इस पर कुछ कहना चाहेंगे?
मीरवाइज: मैंने इस पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं. हमें यकीन है कि यह बिल मुसलमानों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा और समाज में दिक्कत पैदा करेगा. हम चाहेंगे कि ये बिल पास न हो. बिल को अगले सेशन के लिए पोस्टपोंड कर दिया जाना चाहिए. वक्फ यकीन का मुद्दा है, सरकार को इसमें दखल नहीं देना चाहिए.
मीरवाइज ने कहा कि वक्फ का मुद्दा मजहब से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे लोगों की सहमति से सुलझाया जाना चाहिए. जो लोग इंसानियत और भाईचारे में यकीन रखते हैं उन्हें इस बिल के खिलाफ खड़ा होना चाहिए. हमें लगता है कि सरकार इसे पास करने में जल्दबाजी कर रही है. हमें लगता है कि NDA के सहयोगी नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू इस बिल को सपोर्ट नहीं करेंगे और बातचीत अगले सत्र तक स्थगित की जाएगी.