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Kerala News: केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) को बीजेपी हरगिज पसंद नहीं करती है. यह कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की गठबंधन पार्टी है. बीजेपी इस पार्टी का नाम अक्सर राजनीतिक ताने देने के लिए इसका नाम लेती है. उदाहरण के तौर पर, प्रियंका गांधी के वायनाड से संसद में जीतने के बाद बीजेपी ने उन्हें मुस्लिम लीग की नई सदस्य बताकर ताना मारा था।
लोकल बॉडीज चुनाव को लेकर केरल में राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है. इसी कड़ी में मुस्लिम लीग ने तीन महिला उम्मीदवारों—फातिमा तहिलिया, मुफीदा थेस्नी और टी नजमा तबशीरा को एक साथ चुनाव मैदान में उतारकर है. इन्हें पार्टी के नए चेहरे माना जा रहा है.
फातिमा, नजमा और मुफीदा मुस्लिम लीग के महिला विंग 'हरिता' से जुड़ी रही हैं. पार्टी ने 2012 में महिलाओं के लिए यह अलग विंग बनाया था. फातिमा तहिलिया 'हरिता' की पहली अध्यक्ष भी रही हैं.
2012 में इन तीनों महिला नेताओं ने मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) के अध्यक्ष के खिलाफ केरल महिला आयोग में यौन उत्पीड़न का केस किया था. इसके बाद मुस्लिम लीग लीडरशिप ने इन्हें पार्टी से बाहर कर दिया और ब्लैकलिस्ट भी कर दिया. उस समय महिला मोर्चा 'हरिता' भी भंग कर दिया गया था.
चार साल बाद मुस्लिम लीग ने इन्हें वापस पार्टी में शामिल किया और केरल लोकल बॉडीज चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया. यह कदम पार्टी का बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है. तीनों उम्मीदवार न केवल मुस्लिम हैं बल्कि युवा और शिक्षित हैं. पार्टी में बदलाव और ज्यादा लोकतंत्र के लिए भी उन्होंने आवाज उठाई थी. इस फैसले को युवा और महिला वर्ग में जनाधार बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
फातिमा तहिलिया- कोझिकोड नगर निगम, डिप्टी मेयर की दावेदार
मुफीदा थेस्नी- वायनाड जिला पंचायत
टी नजमा तबशीरा- Perinthalmanna (पिछला चुनाव भी जीत चुकी हैं)
तीनों को पिछले साल पार्टी में बड़ी जिम्मेदारियां दी गई थीं. अब लोकल बॉडीज टिकट उन्हें मिलने को क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है.
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग
- IUML की स्थापना आजादी के बाद मार्च 1948 में हुई थी. इसके संस्थापक मोहम्मद इस्माइल थे.
- चुनाव चिन्ह: सीढ़ी, पार्टी का झंडा: हरा, चांद और तारा है.
- पार्टी को केरल में स्टेट पार्टी के रूप में चुनाव आयोग की मान्यता मिली है.
- लोकसभा में 3 सीटें, राज्यसभा में 2 सांसद, 2021 में 15 विधायक हैं.
कई बार IUML को जिन्ना की मुस्लिम लीग से जोड़ा जाता है. ऑल इंडिया मुस्लिम लीग का अस्तित्व बंटवारे के बाद समाप्त हो गया. 1948 में बनी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग आज भी सक्रिय है और केरल में हर चुनाव में यह मजबूत प्रदर्शन करती है. 1952 के बाद कोई भी चुनाव ऐसा नहीं हुआ जिसमें IUML का सांसद न रहा हो. 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मिलकर तीन सीटें जीतीं थीं.