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Munambam Land Dispute में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, Waqf प्रॉपर्टी मामले में HC के आदेश पर रोक

SC on Munambam Land Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने मुनंबम भूमि विवाद में केरल हाईकोर्ट के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है. हालांकि, राज्य सरकार के जरिये गठित जांच आयोग को जांच जारी रखने की इजाजत दी गई है. अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को होगी.

 

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

Kerala News Today: केरल के मुनंबम इलाके की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है. देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था ने केरल हाईकोर्ट की उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें मुनंबम की जमीन को वक्फ संपत्ति न मानने की बात कही गई थी. अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक जमीन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा और यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने केरल वक्फ संरक्षण वेदी की विशेष अनुमति याचिका पर दिया है. कोर्ट ने केरल सरकार को नोटिस जारी करते हुए छह हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को होगी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि केरल सरकार के जरिये गठित जस्टिस सी.एन. रामचंद्रन नायर जांच आयोग के कामकाज पर कोई रोक नहीं लगाई गई है और आयोग अपनी जांच जारी रख सकता है.

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अगली सुनवाई तक केरल हाईकोर्ट की उस घोषणा पर रोक रहेगी, जिसमें विवादित जमीन को वक्फ संपत्ति नहीं बताया गया था. साथ ही अदालत ने यह निर्देश दिया कि जमीन से जुड़ी मौजूदा स्थिति में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच आयोग के काम में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया गया है.

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सिद्दीक सैत ने जमीन की थी दान

यह विवाद केरल के एर्नाकुलम जिले के मुनंबम क्षेत्र की करीब 135 एकड़ जमीन से जुड़ा है. यह जमीन साल 1950 में सिद्दीक सैत नाम के शख्स के जरिये फारूक कॉलेज को दान में दी गई थी. उस समय इस जमीन पर कई स्थानीय परिवार पहले से ही रह रहे थे. बाद के सालों में कॉलेज ने इस जमीन के कुछ हिस्से इन्हीं निवासियों को बेच दिए थे.

इस मामले में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब साल 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में रजिस्टर्ड कर दिया. इसके बाद पहले की गई बिक्री को अवैध माना गया, जिससे 600 से ज्यादा परिवारों को बेदखली का डर सताने लगा. इस फैसले के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए. वक्फ बोर्ड के इस कदम को कोझिकोड वक्फ ट्रिब्यूनल में चुनौती दी गई, जहां मामला अब भी पेंडिंग है.

विवाद और बढ़ते तनाव के बीचनवंबर 2024 में केरल सरकार ने समाधान तलाशने के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सी.एन. रामचंद्रन नायर की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया. इसके खिलाफ केरल वक्फ संरक्षण वेदी ने हाईकोर्ट का रुख किया और तर्क दिया कि वक्फ एक्ट से जुड़े मामलों में राज्य सरकार को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है. हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने इस दलील को स्वीकार करते हुए आयोग को रद्द कर दिया था.

वक्फ के दावे के बाद शुरू हुआ विवाद

हालांकि, बाद में अक्टूबर 2025 में केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एकल न्यायाधीश के फैसले को पलट दिया. डिवीजन बेंच ने न केवल जांच आयोग को वैध ठहराया, बल्कि यह भी टिप्पणी की कि 2019 में वक्फ बोर्ड द्वारा जमीन का पंजीकरण कानून के विपरीत था. अदालत ने कहा कि 1950 का दस्तावेज वक्फनामा नहीं बल्कि गिफ्ट डीड है, और जमीन को वक्फ घोषित करना जमीन पर कब्जे की रणनीति जैसा प्रतीत होता है.

हाईकोर्ट की इन टिप्पणियों को चुनौती देते हुए केरल वक्फ संरक्षण वेदी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने यह तय कर दिया कि जमीन वक्फ है या नहीं, जबकि यह मामला पहले से ही वक्फ ट्रिब्यूनल में लंबित है. साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट का फैसला कार्यपालिका को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप की छूट देता है, जहां कानून के तहत अलग वैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है.

हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, संक्षिप्त सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया, जमीन की यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया और जांच आयोग को अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दी है. मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को होगी. फिलहाल कब्जाधारियों और वक्फ अधिकारियों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं. 

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