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Maulana Tauqeer Raza News: बरेली में शुक्रवार (26 सितंबर) को जुमे की नमाज के बाद बवाल हो गया. कानपुर में 'I Love Muhammad' का बैनर लगाने से शुरू हुआ विवाद देश के कई कोनों में पहुंच गया. इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा ने बीते दिनों बरेली में 'I Love Muhammad' के समर्थन और पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ प्रशासन को ज्ञापन सौंपने का आह्वान किया था. इसको लेकर जब मुस्लिम समुदाय के लोग जुमे की नमाज के बाद इकट्ठा हुए तो पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज कर दिया.
बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान विरोध भीड़ और पुलिस में झड़प हो गई थी.जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भांजी. शनिवार (27 सितंबर) को पुलिस ने बरेली में हिंसा का दावा करते हुए मौके से हथियार और लाठी-डंडा बरामद होने का दावा करते हुए तौकीर रजा समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. मौलाना तौकीर रजा ने एक वीडियो संदेश जारी कर इन झड़पों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि विरोध से पहले उन्हें समर्थकों को संबोधित करने से रोका गया और फिर नजरबंद कर दिया गया.
मौलाना तौकीर रजा की गिरफ्तार के बाद लोग उनके बारे में सर्च करने लगे. आइये जानते हैं कौन हैं मौलाना तौकीर रजा, जिनके एक आह्वान पर इकट्ठी हो गई हजारों मुसलमानों की भीड़, जिसे देखकर बरेली पुलिस के भी रोंगटे खड़े हो गए और उन्हें तितर बितर करने के लिए मजबूरन लाठीचार्ज करना पड़ा.
मौलाना तौकीर रजा खान का शुमार उत्तर प्रदेश के जाने-माने मुस्लिम विद्वान और राजनेताओं में होती हैं. वह अहमद रजा खान बरेलवी के प्रपौत्र (Great-Grandson) हैं, जिन्होंने बरेलवी आंदोलन की शुरुआत की थी. तौकीर रजा खान बरेलवी सुन्नी मुसलमानों के बीच एक प्रभावशाली शख्सियत माने जाते हैं. उन्होंने अपने सियासी सफर की शुरुआत 7 अक्टूबर 2001 को इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल नाम की पार्टी की स्थापना से की. मौलाना तौकीर रजा का ताल्लुक देश के सबसे प्रतिष्ठित सूफी घराने से हैं. उनके भाई मौलाना सुबहान रजा खान, दरगाह आला हजरत के चेयरमैन हैं.
मौलाना तौकीर रजा खान के मुताबिक, उनका मकसद उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय को संगठित कर उनकी तालीमी, समाजी और सियासी हालात को बेहतर करना. अपनी पार्टी के पहले नगरपालिका चुनाव में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल ने 10 सीटें जीती थीं और मेयर उम्मीदवार को 36,000 वोट मिले थे. इसके अलावा तौकीर रजा ने अलग-अलग समय पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को समर्थन दिया.
इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के समर्थन से साल 2009 में कांग्रेस उम्मीदवार प्रवीण सिंह आरोन ने भारतीय जनता पार्टी के छह बार के सांसद रहे संतोष गंगवार को हराया. साल 2012 में मौलाना तौकीर रजा ने विधानसभा चुनाव में शाजिल इस्लाम अंसारी को भोजीपुरा सीट से उम्मीदवार बनाया, जो बड़ी मुस्लिम आबादी वाला क्षेत्र था. हालांकि, इस्लाम अंसारी जीतने के बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए.
इसी तरह मई 2013 में तौकीर रजा को उत्तर प्रदेश हैंडलूम कॉरपोरेशन का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, लेकिन सितंबर 2014 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. मौलाना ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा में नाकाम रही और दंगों की जांच की मांग पूरी नहीं की गई.
धार्मिक क्षेत्र में तौकीर रजा खान ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (जदीद) की स्थापना की. यह बोर्ड मौलाना तौकीर रजा ने तब बनाया जब उन्होंने पुरानी संस्था में देवबंदी सदस्यों पर भेदभाव का आरोप लगाया. 2016 में उन्होंने देवबंद का सफर किया और देवबंदी उलेमा से मुलाकात की, ताकि मुस्लिम समुदाय में इत्तेहाद कायम किया जा सके. हालांकि उनकी इस पहल पर बरेलवी धर्मगुरुओं ने उन्हें फटकार लगाई और एक धार्मिक पैनल ने उन्हें गुनाह करने का दोषी करार दिया.
मौलाना तौकीर रजा खान के बयानों को लेकर अक्सर विवाद होता रहा है, जिसने देश विदेश में सुर्खियां बटोरीं. साल 2007 में उन्होंने बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन के खिलाफ ईनाम की घोषणा की और सरकार से तस्लीमा नसरीन के भारत में एंट्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की. साल 2010 में उन्हें बरेली में हिन्दू-मुस्लिम दंगे के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. मार्च 2024 में एक सत्र अदालत ने मौलाना तौकीर रजा को 2010 के दंगों का मास्टरमाइंड बताया और उनके भाषण को भड़काने वाला करार दिया.
इतना ही नहीं मौलाना तौकीर रजा ने ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर भी बयान दिया, जिससे सरकार के समर्थक भड़क गए. हिंदूवादी संगठनों ने मौलाना पर विद्वेष पैदा करने का आरोप लगाया. 2024 में हल्द्वानी हिंसा के आरोपियों पर कार्रवाई और ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर जेल भरो आंदोलन अभियान चलाया. उनके इस अभियान से बीजेपी सरकार की खूब किरकिरी हुई. इसकी वजह से उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पुलिस ने 9 फरवरी 2024 को मौलाना को गिरफ्तार कर लिया.
अपने धार्मिक दृष्टिकोण में तौकीर रजा खान ने सूफी सम्मेलन और मुस्लिम एकता को लेकर कई बार अपने विचार शेयर किए हैं. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को धर्मिक मतभेदों के बावजूद एकजुट रहना चाहिए और बाहरी समस्याओं के खिलाफ मिलकर काम करना चाहिए. कुल मिलाकर तौकीर रजा खान उत्तर प्रदेश में मुसलमानों, खासतौर से बरेलवी सुन्नी मुसलमानों में एक प्रभावशाली धार्मिक और सियासी शख्सियत हैं. वह अक्सर दक्षिणपंथी सरकार विरोधी बयान, सियासी समर्थन और धार्मिक पहल को लेकर हमेशा से सुर्खियों में बने रहते हैं.