BSP MLA on Uttarakhand Madarsa Syllabus: बीते दिनों उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने ऐलान किया कि मदरसों के सिलेबस में 'ऑपरेशन सिंदूर' का चैप्टर शामिल किया जाएगा. मदरसा बोर्ड के इस ऐलान पर लक्सर बीएसपी विधायक मोहम्मद शहजाद का बड़ा बयान सामने आया है.
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Uttarakhand Madarsa Syllabus: उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने मदरसों के सिलेबस में 'ऑपरेशन सिंदूर' को शामिल करने का फैसला किया है. इस पर लोगों की मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आई है. इस बीच रुड़की के लक्सर विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (BSP) के विधायक मोहम्मद शहजाद का बड़ा बयान सामने आया है. उनके बयान ने प्रदेश का सियासी पारा बढ़ा दिया.
मदरसे के सिलेबस में 'ऑपरेशन सिंदूर' को शामिल किए जाने के फैसले को मोहम्मद शहजाद ने नादानी भरा फैसला बताया है. बीएसपी विधायक मोहम्मद शहजाद ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' अभी कंप्लीट नहीं हुआ है और ऐसे में मदरसा बोर्ड के फैसले को ऐतिहासिक बताना वह नादानी समझते हैं.
लक्सर सीट से बीएसपी विधायक मोहम्मद शहजाद ने सिलेबस में कुछ शामिल करने या हटाने का फैसला सरकार लेदी है न कि मदरसा बोर्ड फैसले लेता है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले किताब छपवाएं और 'ऑपरेशन सिंदूर' कहां से शुरू हुआ है और कहां खत्म हुआ है, इस बारे में मदरसा बोर्ड पूरा बताए.
बीएसपी विधायक मोहम्मद शहजाद ने कहा कि मदरसा बोर्ड के जरिये लिया गया फैसला जल्दबाजी और हवा में लिया गया है, जिसको वह कुछ नहीं समझते हैं. उनके इस बयान के बाद उत्तराखंड में सियासी तपिश बढ़ सकती है.
बता दें, उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड ने मंगलवार (20 मई) को ऐलान किया कि वह भारतीय सेना के हालिया सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' को अपने सिलेबस में शामिल करेगा. उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी और पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियान के प्रति समर्थन जताया था. इसी के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' को मदरसा सिलेबस में शामिल करने का फैसला लिया गया है.
उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष मुफ्ती कासमी ने कहा, "हम अपने बच्चों के साथ 'ऑपरेशन सिंदूर' के कामयाबी की कहानी शेयर करना चाहते हैं, जिससे आने वाल पीढ़ियां यह जान सकें कि हमारी भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन को पूरी ताकत, बहादुरी और साहस के साथ अंजाम तक पहुंचाया था और इस ऑपरेशन के दौरान किसी भी आम नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचाया." वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 451 मदरसे हैं, जिनमें 50 हजार से ज्यादा बच्चे तालीम हासिल कर रहे हैं.