Mohd Arif Ahmad Case: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत एक याचिकाकर्ता को राहत देते हुए IPC की धारा 494 के तहत दो शादी के आरोप रद्द कर दिए. हालांकि, दहेज, मारपीट और धमकी जैसे अन्य मामलों में ट्रायल जारी रहेगा.
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Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक, एक मुस्लिम याचिकाकर्ता के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने IPC की धारा 494 के तहत लगाए गए दो विवाह के आरोपों को रद्द कर दिया. कोर्ट साफ कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ कुछ शर्तों के साथ एक से ज्यादा शादी करने की इजाजत देता है.
दरअसल, मोहम्मद आरिफ अहमद जहागीर खान ने दो शादी की है. इस शादी के बाद उनकी पहली बीबी ने साल 2022 में जबलपुर के महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ IPC की धारा 498ए (दहेज उत्पीड़न), 494 (बिगैमी), 342 (ग़ैरकानूनी तरीके से बंदी बनाना), 323 (मारपीट) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत केस दर्ज किया गया था.
सुनवाई के दौरान जज ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उनकी शादी को 20 साल हो चुके हैं और इस दौरान उनकी पत्नी ने कभी कोई शिकायत नहीं की. लेकिन जब उन्होंने दूसरी शादी की, तभी उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत, पहली पत्नी के जिंदा रहते हुए दूसरी शादी करना कानूनी रूप से मान्य है. वहीं, इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस बी. पी. शर्मा की पीठ ने कहा कि चूंकि दोनों पक्ष मुस्लिम हैं और उन पर मुस्लिम पर्सनल लॉ लागू होता है, इसलिए IPC की धारा 494 के तहत द्विविवाह का मामला नहीं बनता. इसी आधार पर अदालत ने इस धारा के तहत लगाए गए आरोप को खारिज कर दिया.
इस आरोपों पर चलती रहेगी बहस
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को अन्य आरोपों से राहत नहीं दी जा सकती. अदालत ने कहा कि दहेज उत्पीड़न, मारपीट, गैरकानूनी बंदी बनाना और आपराधिक धमकी जैसे आरोप गंभीर हैं और इन पर ट्रायल जारी रहेगा. यानी IPC की धारा 498ए, 342, 323 और 506 के तहत केस चलता रहेगा और निचली अदालत में सुनवाई जारी रहेगी.