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Ajmer News: हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता पूरे देश में हंगामा मचा रहे हैं. इस बीच राजस्थान में मौजूद अजमेर दरगाह को हिंदू संगठन ने दावा किया था कि वह एक मंदिर है और दरगाह का सर्वे को लेकर कोर्ट का भी रुख किया था. अब हिंदू संगठन के कार्यकर्ता 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' को मंदिर बता रहे हैं और वहां हनुमान चालीसा का पाठ करने की इजाजत मांग रहे हैं.
महाराणा प्रताप सेना के संस्थापक अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने संगठन के सदस्यों के साथ मिलकर 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' पर हनुमान चालीसा का पाठ आयोजित करने की अनुमति मांगते हुए जिला प्रशासन को एक आवेदन सौंपा है. इस आवेदन के जमा होने के बाद प्रशासनिक और पुरातात्विक दोनों ही स्तरों पर गतिविधियां तेज हो गई हैं. संगठन की ओर से जिला कलेक्टर को दिए गए पत्र में कहा गया है कि यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था और संकल्प को व्यक्त करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाना प्रस्तावित है.
हिंदू मंदिर होने का किया गया दावा
आवेदन में दावा किया गया कि संगठन के कार्यकर्ता ऐतिहासिक स्थल परिसर में शांतिपूर्ण तरीके से हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहते हैं इसके साथ ही संगठन ने यह भी कहा कि यह स्थल केवल ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि मूल रूप से “संस्कृत कंठाभरण विद्यालय और हिंदू मंदिर” रहा है. राजवर्धन सिंह परमार ने अपने दावे के समर्थन में परिसर की वास्तुकला और दीवारों पर उकेरे गए प्रतीकों का हवाला दिया है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है.
ASI से ADM ने मांगा रिपोर्ट
अतिरिक्त जिला कलेक्टर (शहर) की तरफ से ASI के अजमेर उपमंडल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है. प्रशासन ने चार अहम बिंदुओं पर स्पष्ट राय मांगी है, जिनमें कार्यक्रम की अनुमति दिए जाने पर अभिमत, परिसर में पहले ऐसे आयोजन होने की जानकारी, किसी समुदाय विशेष में संभावित आक्रोश और साम्प्रदायिक तनाव की आशंका शामिल है. दूसरी तरफ, ASI ने प्राथमिक स्तर पर इस आयोजन को लेकर चिंता जाहिर की है. एएसआई के वरिष्ठ संरक्षण सहायक ने प्रशासन को भेजे पत्र में कहा है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन से साम्प्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. साथ ही, इस विषय में आगे की कार्रवाई और दिशा-निर्देश के लिए जोधपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् से भी मार्गदर्शन मांगा गया है.
देश में कई मस्जिदों को लेकर हो रहा है बवाल
गौरतलब है कि हिंदू संगठनों का दावा है कि देश भर में कई मस्जिदें असल में मंदिर थीं. यह विवाद अयोध्या से शुरू हुआ था, अब मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में फैल गया है. हाल ही में भोजशाला के संबंध में एक हिंदू संगठन ने दावा किया कि यह जगह एक मंदिर है. संगठन के कार्यकर्ताओं ने अदालतों का रुख किया, और तब से इंदौर हाई कोर्ट ने भोजशाला को एक मंदिर के रूप में मान्यता दे दी है. इससे पहले एक हिंदू संगठन ने यह भी दावा किया था कि अजमेर दरगाह असल में एक मंदिर थी और उसने अदालतों में याचिका दायर की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह मामला फिलहाल शांत हो गया है.