)
Maharashtra Jalgaon Protest: महाराष्ट्र के जल गांव में हजारों लोगों ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया. मुस्लिम संगठनों ने इस कानून को काला कानून और मज़हब की आज़ादी पर सीधा हमला करार दिया.
यह प्रदर्शन तहेफ़्फ़ुज़ औकाफ़ कमेटी जळगांव (वक्फ बचाओ समिति) की तरप से सोमवार को आयोजित किया गया था और इसे 'जेल भरो आंदोलन' के बैनर तले चलाया गया. यह आंदोलन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की राष्ट्रव्यापी योजना का हिस्सा है.
ऑर्गनाइजर्स के मुताबिक, जलगांव देश का पहला जिला बना जहां पुलिस की इजाजत न मिलने के बावजूद पूरे पैमाने पर जेल भरो आंदोलन आयोजित किया गया. इससे पहले 12 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर AIMPLB ने ऐसा ही प्रदर्शन करने की कोशिश की थी.
दिन की शुरुआत दो घंटे के धरने से हुई. इसके बाद करीब 2,000 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया और जिला पेठ थाने में रखा, जहां से उन्हें शाम तक रिहा कर दिया गया.
आयोजक फारूक शेख ने कहा,"हमने खुद को अपनी मर्जी से पुलिस के हवाले किया. इस आंदोलन में न केवल मुस्लिम बल्कि सभी समुदायों और राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोग शामिल हुए, जो न्याय, समानता और संविधान में विश्वास रखते हैं. जलगांव ने शांतिपूर्ण तरीके से इस राष्ट्रीय आंदोलन की अगुवाई की है. हमारा संदेश साफ है कि हम इस असंवैधानिक कानून को किसी भी कीमत पर कबूल नहीं करेंगे.
इस दौरान तहेफ़्फ़ुज़ औकाफ़ कमेटी के अध्यक्ष मुफ्ती खालिद के नेतृत्व में एक डेलिगेशन ने अतिरिक्त कलेक्टर श्रीमंत हारकर से मुलाकात की और राष्ट्रपति के नाम पांच मांगों वाला ज्ञापन सौंपा.
- वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की तत्काल वापसी
- केंद्र सरकार के वक्फ संपत्तियों पर कंट्रोल को खत्म करना
- कम्यूनिटी के जरिए संचालित आज़ाद और पारदर्शी वक्फ बोर्डों की स्थापना.
- वक्फ की जमीन पर अतिक्रमण और अवैध हस्तांतरण के खिलाफ सख्त कार्रवाई
- मस्जिदों, मदरसों व दरगाहों की ई-रजिस्ट्रेशन की समय सीमा (जो 5 दिसंबर तय है) बढ़ाने की मांग
मुफ्ती खालिद ने कहा, “यह कानून न केवल हमारे धर्म में दखल देता है, बल्कि हमारे संस्थानों को खुद संचालित करने के अधिकार को भी छीनता है. हमारे बुजुर्गों ने बंटवारे के समय भारत में रहने का फैसला इसलिए किया था क्योंकि उन्हें न्याय और समानता पर भरोसा था. यह आंदोलन उसी वादे की रक्षा के लिए है-आस्था, संविधान और न्याय को साथ लेकर." उन्होंने कहा कि यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 25 से 30 के तहत दिए गए अधिकारों का उल्लंघन करता है.
इस प्रदर्शन को कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिला, जिनमें बहुजन क्रांति मोर्चा, एनसीपी (अजीत पवार गुट) और वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) शामिल थे. VBA की जिला अध्यक्ष शमीभा भानुदास पाटिल ने इन पांचों मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि यह संशोधन मनुवादी और संघवादी सोच की उपज है, जो मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता को सीमित करने की कोशिश करती है.