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नई दिल्ली: जमीयत उलेमा ए हिंद के सद्र मौलाना महमूद मदनी ने तीन दिन पहले भोपाल में बयान दिया था, "जब- जब जुल्म बढ़ेगा जिहाद होगा." मदनी के इस बयान पर देशभर में बवाल मच गया. भाजपा नेताओं और दक्षिण पंथी संगठनों के लोगों के साथ कुछ मुस्लिम नेताओं और उलेमा ने भी मदनी के इस बयान का विरोध किया है. वहीँ, कुछ लोग मदनी के बयान की हिमायत कर रहे हैं. यहाँ तक कि बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी कहा है कि महमूद मदनी के बयान में कुछ भी गलत नहीं है.
बयान देने के तीन दिन बाद महमूद मदनी ने अपने बयान पर किसी तरह की सफाई देने / खंडन करने के बजाये अपने बयान पर कायम रहने और उसका स्पष्टीकरण दिया है. मदनी ने कहा कि वो चाहते हैं कि उनके बयान पर सिविल सोसाइटी, अदालत और सरकार संज्ञान लें और उन्हें तलब करे, तो उनक मकसद पूरा होगा.
मदनी ने कहा देश का सभी मीडिया और कुछ लोग इस्लाम में जिहाद जैसे पाक शब्द को बदनाम कर रहे हैं. इसके बहाने इस्लाम और मुसलमान को गाली दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस्लाम में जिहाद का मतलब है 'सत्य के लिए संघर्ष' करना. ये जिहाद दो तरह का है एक जिहाद असगर यानी जुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाना. दूसरा है जिहाद अकबर यानी अपने नफ्स (इन्द्रियों पर नियंत्रण) पर काबू पाना.
लेकिन कुछ लोगों ने इस्लाम के इस पाक शब्द को हर बुरी चीज़ से जोड़ दिया है. लैंड जिहाद, लव जिहाद, थूक जिहाद, वोट जिहाद, UPSC जिहाद, जूस जिहाद, मीडिया जिहाद, न जाने कैसे-कैसे जिहाद का इजाद कर लिया है. पहले मुसलमानों को चिढाने और इस्लाम को गाली देने का काम छोटे स्तर के लोग करते थे. फिर विधायक, सांसद, मंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्य मंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने ऐसा करना शुरू कर दिया. महमूद मदनी इसके पीछे सरकार और मंत्रालय को दोषी मानते हैं.
मदनी ने कहा, नेशनलिज़म एक सामूहिक भावना और प्रयास है. आप देश के एक नागरिक को गाली देकर इसे हासिल नहीं कर सकते हैं. आतंकवादी संगठन और पाकिस्तान हमेशा से जिहाद का गलत इस्तेमाल करता आया है. इसके नाम पर मुसलमानों को भड़काता है. जमीयत उलेमा ए हिंद पिछले 30 सालों से जिहाद की आड़ में प्रोपगंडा फैलाने वाले आतंकवादी संघटनों और पाकिस्तान को एक्सपोज करने का काम करता आ रहा है.
मदनी ने कहा मैं हमेशा से कहता आया हूँ कि असली जिहादी हम है. देश का शरीफ अमन पसंद मुसलमान है. आतंकवादी जिहादी नहीं वो फसादी है. लेकिन जब आप हर बुरी चीज़ को जिहाद से जोडकर मुसलमान और इस्लाम को गाली देते हैं, तो आप पाकिस्तान और आतंकवादियों का समर्थन कर रहे होते हैं. इसलिए आप को जिहाद का मतलब समझना होगा.. हम जुल्म और नाइंसाफी के खिलाफ जिहाद करते रहेंगे.
मदनी पर सुप्रीम कोर्ट पर भी हमले करने के इलज़ाम लगाए गए हैं, लेकिन मदनी ने इसे ख़ारिज कर दिया. उन्होंने कहा, " मेरी आवाज़ मुस्लिम समाज की सामूहिक चिंता की अभिव्यक्ति भर है. आज को मुसलमान जो फील कर रहा है, वो ही मैं कह रहा हूँ.
मदनी ने वंदे मातरम को लकर कहा कि आप किसी से जबरदस्ती नहीं कर सकते. मुसलमानों का अकीदा (आस्था) एक ईश्वरवादी है. आप हर चीजों के सामने सर हमारा झुकाना चाहते हैं आखिर क्यों? हमें मुसलमान रहने दीजिए.
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