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Malegaon Blast Case: NIA कोर्ट ने बढ़ाई सजा सुनाने की तारीख, जानें अब कब आएगा फैसला

Malegaon Blast Case: मालेगांव विस्फोट मामला 29 सितंबर 2008 का है, जब महाराष्ट्र के मालेगांव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच रात 9:35 बजे जोरदार बम धमाका हुआ. पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

Malegaon Blast Case: NIA कोर्ट ने बढ़ाई सजा सुनाने की तारीख, जानें अब कब आएगा फैसला

Malegaon Blast Case: महाराष्ट्र के सबसे चर्चित मालेगांव ब्लास्ट केस में आज यानी 8 मई को फैसला आना था, लेकिन इस बार भी मामले में फैसला टल गया है. NIA की स्पेशल कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट से सजा सुनाने के लिए 31 जुलाई 2025 तक का वक्त मांग लिया है. साल 2008 में हुए इस धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग जख्मी हुए थे. अब इस केस में फैसला आने में और देर हो गई है, जिस पर पीड़ित परिवार और आरोपी पक्ष दोनों की निगाहें टिकी हुई हैं. इस बीच बीजेपी के पूर्व सांसद और मालेगांव ब्लास्ट केस की मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने बड़ा बयान दिया है.

वहीं, की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ने मीडिया से कहा, "यह तय नहीं था कि आज फैसला आएगा. यह तय है कि अगली सुनवाई में फैसला आएगा. जज ने कहा कि इसमें 1 लाख से ज्यादा पेज हैं. यह बड़ा मामला है, इसमें समय लगता है. किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए. अगली तारीख 31 जुलाई दी गई है."

ब्लास्ट में गई थी कई लोगों की जान
गौरतलब है कि मालेगांव विस्फोट मामला 29 सितंबर 2008 का है, जब महाराष्ट्र के मालेगांव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच रात 9:35 बजे जोरदार बम धमाका हुआ. ये धमाका शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट के सामने हुआ था. इस ब्लास्ट में 6 लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 101 लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए. धमाके के लिए एक मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें विस्फोटक लगाकर उसे वहां खड़ा किया गया था. इस मामले की जांच पहले महाराष्ट्र एटीएस ने की और बाद में एनआईए को सौंपी गई. मामला अब भी कोर्ट में लंबित है.

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प्रज्ञा ठाकुर को बनाया गया था आरोपी
एनआईए की रिपोर्ट के मुताबिक 2008 मालेगांव ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई मोटरसाइकिल पूर्व सांसद प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर रजिस्टर्ड थी. पहले इस मामले की जांच महाराष्ट्र एटीएस ने हेमंत करकरे की अगुवाई में की थी. जांच में पता चला कि मोटरसाइकिल का कनेक्शन गुजरात के सूरत तक पहुंचता है और फिर सीधे प्रज्ञा ठाकुर से जुड़ता है. इसी आधार पर एटीएस ने प्रज्ञा ठाकुर को आरोपी बनाया था. हालांकि बाद में एनआईए ने कुछ धाराएं हटा दीं, लेकिन मामला अब भी कोर्ट में चल रहा है और फैसला आने में लगातार देरी हो रही है.

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