Maulana Arshad Madani on Bulldozer Action: मौलाना अरशद मदनी ने बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने उत्तर प्रदेश में मदरसों के खिलाफ हो रहे एक्शन पर रद्देअमल जाहिर किया है.
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Maulana Arshad Madani on Bulldozer Action: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के चीफ मौलाना अरशद मदनी ने यूपी सरकार के खिलाफ नाराजगी का इजहार किया है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद उत्तर प्रदेश में सैकड़ों मदरसों, दरगाहों और ईदगाहों के खिलाफ यूपी सरकार ने कार्रवाई की है. जिसपर मौलान अरशद मदनी का रद्देअमल सामने आया है. उन्होंने, इसे संविधान को रौंदने की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पूर्ण अवहेलना और अपमान बताया है.
मौलाना अरशद मदनी के निर्देश पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने अक्टूबर 2024 में मदरसों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई या नोटिस पर रोक लगा दी थी. लेकिन, इसके बाद भी यूपी सरकार ने मदरसों के खिलाफ एक्शन को जारी रखा है.
उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के बीच एकता बनाने पर भी जोर दिया. मौलाना मदनी ने कहा कि मदरसों को निशाना बनाने की कोशिश न केवल मुसलमानों को राजनीतिक तौर पर कमजोर करने की साजिश है, बल्कि उन्हें मज़हबी तालीम से भी वंचित करने की साजिश है. यह अभियान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का साफ तौर पर उल्लंघन है और देश के संविधान को रौंदने की कोशिश है.
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि ऑपरेशन अभी नेपाल के सीमावर्ती जिलों में शुरू किया गया है. लेकिन, सरकार की लेकिन सरकार की बदनियती और उकसावे की भावना पूरी तरह साफ है. इस अवैध ऑपरेशन का दायरा न केवल बढ़ सकता है, बल्कि इससे नए मदरसे बनाने में भी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं.
अरशद मदनी ने कहा उन्हें याद रखना चाहिए कि देश को ब्रिटिश गुलामी से आजाद कराने की कवायद मदरसों से ही शुरू हुई थी. दारुल उलूम देवबंद की स्थापना अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने और देश को आजाद करने के लिए की गई थी.
यूपी सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह नेपाल की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के सभी मुस्लिम बहुल जिलों में न केवल मदरसों बल्कि दरगाहों, ईदगाहों और कब्रिस्तानों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई कर रही है. अब तक सैकड़ों मदरसों को अवैध घोषित कर सील कर दिया गया है और कई मदरसों को ध्वस्त भी किया जा रहा है.
सरकार की इस तथाकथित अवैध कार्रवाई से मुसलमानों में गंभीर फिक्र और डर की लहर फैल गई है. इसके मद्देनजर जमीयत उलेमा-ए-हिंद जून 2025 में सरायमीर, आजमगढ़ में मौजूद जामिया शरिया फैज मालूम में तहफ्फुज मदरसा सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है, ताकि मदरसों के जिम्मेदारों से बातचीत कर आगे की रणनीति तय की जा सके.
मौलाना अरशद मदनी ने मदरसों के खिलाफ लिया जा रहे इन एक्शन्स को मुसलमानों की मज़हबी आज़ादी पर गंभीर हमला बताया है. उन्होंने कहा कि मदरसा संरक्षण सम्मेलन के जरिए से मदरसों के लिए जिम्मेदार सभी लोगों की सहमति से मदरसों के संरक्षण के लिए एक व्यापक और प्रभावी रणनीति विकसित की जाएगी.