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Meerut News Today: उत्तर प्रदेश में एक और मस्जिद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. दिलचस्प बात यह है कि इस बार किसी दक्षिणपंथी संगठन ने नहीं, बल्कि खुद पुलिस ने मस्जिद की जमीन को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है. प्रशासन का दावा है कि मस्जिद पुलिस थाने की जमीन पर बनी हुई है, जबकि मस्जिद इंतजामिया का कहना है कि यह जमीन वक्फ बोर्ड की है और उनके पास इसके दस्तावेज भी मौजूद हैं. अब दोनों पक्षों के दावों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बन गया है.
यह पूरा मामला मेरठ जिले के खरखौदा क्षेत्र का है. यहां स्थित जामा मस्जिद, जिसे स्थानीय लोग "थाने वाली मस्जिद" के नाम से भी जानते हैं, उसकी जमीन को लेकर विवाद सामने आया है. मस्जिद खरखौदा पुलिस थाने के अहाता में मौजूद है.
पुलिस ने दावा किया कि हाल ही में राजस्व विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई कि मस्जिद का निर्माण कथित तौर पर पुलिस थाने की जमीन पर किया गया है. सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने मस्जिद के इमाम अब्दुल गफ्फार से जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज मांगे.
अधिकारियों का कहना है कि इतवार (14 जून) शाम तक मस्जिद प्रबंधन की ओर से ऐसे कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं किए गए, जिनसे यह साबित हो सके कि जमीन मस्जिद या वक्फ बोर्ड की है. इसके बाद पुलिस ने इमाम को सात दिन का नोटिस जारी कर जवाब देने और जरुरी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है.
दूसरी ओर मस्जिद प्रबंधन ने पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि जिस जमीन पर मस्जिद बनी हुई है, वह वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज है. मस्जिद प्रबंधन का दावा है कि इस संबंध में उपलब्ध दस्तावेज पहले ही पुलिस को सौंपे जा चुके हैं और मस्जिद पूरी तरह वक्फ संपत्ति पर मौजूद है.
पुलिस का कहना है कि मेरठ-बुलंदशहर मार्ग पर मौजूद खरखौदा पुलिस थाना आजादी से पहले का है. राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक, खसरा संख्या 1217 की लगभग 6,450 वर्ग मीटर जमीन कई दशकों से पुलिस थाने के नाम दर्ज है. अधिकारियों का आरोप है कि बाद में इसी जमीन के एक हिस्से पर अतिक्रमण कर मस्जिद का निर्माण कर लिया गया.
किठौर क्षेत्राधिकारी प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग की रिपोर्ट में विवादित भूमि को पुलिस थाने की संपत्ति का हिस्सा बताया गया है. उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत इमाम को नोटिस जारी किया गया है. नोटिस में सात दिनों के भीतर कथित अवैध निर्माण हटाने और संबंधित दस्तावेज जमा करने को कहा गया है.
खरखौदा थाना प्रभारी राजपाल सिंह ने बताया कि यह नोटिस 13 जून को दिया गया था और जवाब के लिए सात दिन का समय निर्धारित किया गया है. उन्होंने कहा कि अब तक नोटिस का कोई औपचारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ है.
सियासत में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, रूरल एएसपी अभिजीत कुमार ने बताया कि मस्जिद कई सालों पुरानी है. उन्होंने कहा कि हाल ही में पुलिस थाने की जमीन की सीमांकन प्रक्रिया के दौरान यह मामला सामने आया. उनके मुताबिक, नोटिस जारी कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई दस्तावेजों की जांच के आधार पर की जाएगी.
इमाम अब्दुल गफ्फार ने प्रशासन के दावों को खारिज करते हुए कहा कि साल 1985 में यह जमीन वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज की गई थी. उनका कहना है कि इससे जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं और उन्हें पहले ही पुलिस को सौंपा जा चुका है. उन्होंने दोहराया कि मस्जिद वक्फ संपत्ति पर ही मौजूद है.