Mumbai Masjid Property Demolished: मुसलमानों के धार्मिक स्थलों और मदरसों पर बुलडोजर कार्रवाई अब महाराष्ट्र में पहुंच चुकी है. मुंबई के मानखुर्द में MHADA ने नूर इलाही मस्जिद से जुड़ी 13 दुकानों को ध्वस्त कर दिया. ये दुकानें 23 सालों से मस्जिद और मदरसे का जरिया था. MHADA की इस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं. ट्रस्टियों ने इसे बीजेपी नेताओं की साजिश बताया.
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Mumbai News Today: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और असम के बाद अब महाराष्ट्र में मुसलमानों के धार्मिक स्थलों और मदरसों पर बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हो गई है. दरअसल, महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) ने मानखुर्द लिंक रोड पर स्थित नूर इलाही मस्जिद की मिल्कियत वाली 13 दुकानों को ध्वस्त कर दिया. ये दुकानें वहां पिछले 23 सालों से थी और इसकी आमदनी से मस्जिद और मदरसे का खर्च चलता था.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस कार्रवाई से पहले महज 27 जून का नोटिस जारी किया गया था, जिसमें दुकानों को अवैध बताया गया था साथ ही बिना इजाजत या अनापत्ति प्रमाण पत्र के कॉमर्शियल इस्तेमाल का आरोप लगाया है. नूर इलाही मस्जिद के कोषाध्यक्ष फैयाज अहमद शाह ने आरोप लगाया कि MHADA ने चालाकी से मस्जिद की सम्पत्ति को विभाजित किया, उनकी दुकानें अवैध घोषित कीं, और यह वादा किया था कि मस्जिद की संरचना को नहीं छुआ जाएगा.
मुंबई के नूर इलाही मस्जिद की 23 साल पुरानी 13 दुकानों को MHADA ने ध्वस्त कर दिया. ये दुकानें मस्जिद और मदरसे की आमदनी का स्रोत थीं. मस्जिद ट्रस्टीज ने बीजेपी नेताओं संजय दीना पाटिल, नीतीश राणे और किरीट सोमैया पर जमीन हड़पने की साजिश का आरोप लगाया.@salaamtvnews pic.twitter.com/3Krr5e8bJl
— Raihan Shahid (@RaihanShahid3) August 17, 2025
फैयाज अहमद शाह ने सवाल किया कि "क्या यह ऊपर से दबाव है, अगर है तो किसका? क्या धार्मिक संपत्ति को इस तरह खत्म किया जाता है?" ट्रस्टीज ने MHADA के इस कार्रवाई को राजनीति से प्रभावित करार दिया. ट्रस्टीज ने आशंका जताई कि BJP के नेता, जिनमें सांसद संजय दीना पाटिल, नीतीश राणे और किरीट सोमैया की मिलीभगत से इस बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने की साजिश हो सकती है.
एक ट्रस्टी ने स्पष्ट कहा, "कुछ लोग अपनी जेब भरने के लिए धार्मिक राजनीति की आड़ में इस तरह की कार्रवाई कर रहे हैं. अपनी रानीतिक रोटी सेंकने के लिए वह मुसलमानों को निशाना बना रहे हैं." एक दुकानदार ने अपना दर्द बयां करते हुए सवाल किया कि "पहले संपत्ति का विभाजन, फिर अवैध ठहराना और उसके बाद ऊपर से दबाव. क्या यह मुस्लिम समुदाय को टार्गेट करने, उनको नीचा दिखाना और फिर अपमान करना नहीं है."
दूसरी तरफ मस्जिद-मदरसे की मिल्कियत वाली संपत्ति पर कार्रवाई के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था. जैसे ही दुकानों का निर्माण गिराया गया, मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इकट्ठा हो गया. अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को डर है कि मुसलमानों को आर्थिक रुप से नुकसान पहुंचाने के लिए यह एक तरह का पैटर्न है.
ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नूर इलाही मस्जिद के ट्रस्टीज ने साफ कहा कि वह धार्मिक स्थलों और मदरसों की संपत्ति को बचाने की लड़ाई जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि MHADA, पुलिस और राजनीतिक दलों से यह भी जानना चाहेंगे कि आखिर ऊपर से कौन दबाव डाल रहा था, जिसकी वजह से 23 साल के इतिहास को चंद घंटों में मिटा दिया गया.
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