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Maulana Aazad Fellowship बंद होने पर भिड़े ओवैसी और किरेन रिजिजू; भेद-भाव का इल्ज़ाम

Maulana Azad Fellowship: भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा मौलाना आजाद फेलोशिप बंद करने पर सांसद असदुद्दीन ने गंभीर सवाल खड़े किए, जिसके बाद कंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने असदुद्दीन के सवालों का जवाब दिया है. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें. 

 

Maulana Aazad Fellowship बंद होने पर भिड़े ओवैसी और किरेन रिजिजू; भेद-भाव का इल्ज़ाम

Maulana Azad Fellowship: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अल्पसंख्यक समुदायों को मिलने वाली प्री-मैट्रिक फेलोशिप को बंद करने पर गंभीर सवाल उठाए हैं. दरअसल, अल्पसंख्यक समुदायों को मौलाना आजाद राष्ट्रीय फेलोशिप मिलता था. लेकिन साल 2022 में इस फेलोशिप को बंद कर दिया गया. इस योजना का उद्देश्य अल्पसंख्यकों को उच्च शिक्षा में अवसर प्रदान करना था.

असदुद्दीन ओवैसी ने मौलाना आजाद फेलोशिप को खत्म करने पर कहा कि मुस्लिम समाज का प्रतिनिधित्व पहले से ही बहुत कम है. उन्होंने यह भी दावा किया कि 2023-24 के बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के कोष में भारी कटौती की गई है और मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी के बावजूद यह बजट जस का तस है. इस बीच, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रीकिरेन रिजिजू ने ओवैसी के बयान को सिरे से खारिज कर दिया है. सांसद किरेन रिजिजू ने असदुद्दीन को जवाब देते हुए कहा कि छात्रवृत्ति केवल कक्षा 9 और 10 के लिए है, क्योंकि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जाती है.

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने यह भी कहा कि मौलाना आजाद राष्ट्रीय फेलोशिप योजना को इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि यह दीगर मंत्रालयों और विभागों की योजनाओं जैसी थी. असदुद्दी ओवैसी ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम छात्रवृत्ति को प्रतिबंधित करने का एक बहाना है. प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति का वास्तविक उद्देश्य छात्रों की ड्रॉपआउट दर को कम करना था, जो कक्षा 9 या 10 से बहुत पहले शुरू हो जाती है. यह योजना अल्पसंख्यक परिवारों पर शिक्षा के खर्च का बोझ कम करने में मदद करती थी.

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गौरतलब है कि मौलाना आजाद फेलोशिप से सबसे ज्यादा मुस्लिम समाज के छात्रों को मदद मिलती थी, जिससे वह उच्च स्तर की शिक्षा ले पाते थे. इस फेलोशिप के बंद होने से मुस्लिम छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

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Zeeshan Alam

जीशान आलम Zee Media में ट्रेनी जर्नलिस्ट हैं. वह बिहार के छपरा के निवासी हैं और दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया है. सियासत और मुस्लिम माइनॉरिटी से जुड़ी ख़बरें वो आ...और पढ़ें

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