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West Bengal News Today: भारत में इन दिनों मुस्लिम समुदाय कई तरह की मुसीबतों से परेशान है. खासकर दक्षिणपंथी शासित राज्यों में जहां पुलिस प्रशासन एक खास समुदाय को टार्गेट पर रखकर कार्रवाई कर रही है. इसी तरह की इंसानियत को शर्मशार करने वाली घटना तब सामने आई है, जब दिल्ली पुलिस ने पश्चिम बंगाल की रहने वाली सोनाली खातून और उनके परिवार को महज संदेह की बुनियाद पर बांग्लादेश में पुशबैक कर दिया.
फिलहाल पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की रहने वाली सोनाली खातून (जिन्हें सोनाली बीबी या सोनाली शेख के नाम से जाना जाता है) और उनका परिवार अब भी अपने वतन भारत लौटने की राह देख रहा है. दिल्ली पुलिस ने बीते माह जून 2025 में उन्हें रातों-रात पुलिस ने 'बांग्लादेशी नागरिक' बताकर सरहद पार भेज दिया था. इसके बाद हाईकोर्ट ने सोनाली और उनके परिवार को वतन वापस लाने का आदेश दे दिया. हालांकि, अब कोर्ट की समयसीमा खत्म हो जाने के बाद भी वह अभी भी विदेशी जमीन पर फंसी हुई हैं.
इस मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद समीर हुसैन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सोनाली खातून और अन्य 16 लोगों को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार ने कोई कोशिश नहीं की. कोर्ट ने चार हफ्ते का वक्त दिया था, लेकिन यह समयसीमा अब खत्म हो चुकी है और केंद्र अब भी खामोश है.
पश्चिम बंगाल सरकार में राज्य मंत्री शशि पांजा ने भी केंद्र की इस चुप्पी की कड़ी निंदा की है. आरोप है कि सोनाली समेत अन्य भारतीय नागरिकों को पुलिस ने जबरन 'पुशबैक' कर बांग्लादेश भेज दिया था. भारतीय नागरिक होने के बावजूद वे आज शरणार्थी जैसी स्थिति में हैं. यह मामला उजागर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के रिहायशीयों को वापस लेने के लिए मुहिम शुरू कर दी और अदालत का दरवाजा खटखटाया.
इस नाइंसाफी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस को हाईकोर्ट में कामयाबी मिली. कोलकाता हाईकोर्ट ने सोनाली और अन्य 16 लोगों को भारत का वैद्य शहरी बताते हुए केंद्र सरकार को उन्हें वापस लाने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया. अदालत ने इसके लिए शुक्रवार (24 अक्टूबर) तक डेडलाइन दी थी, लेकिन अब वह समय भी बीत गया है और केंद्र सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
अखबारे मशरिक में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीच सोनाली और बाकी लोग अब भी ढाका में भारतीय दूतावास और बांग्लादेश हाई कमीशन से उम्मीद लगाए बैठे हैं. बताया जा रहा है कि लगातार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आ पाया है. पीड़ित परिवारों को वतन वापस लाने के लिए समीर हुसैन ने दोबारा कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारियां शुरू कर दी हैं.
समीर हुसैन ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर वे सोनाली और बाकी लोगों को भारत वापस लाने के हर संभव कोशिश करेंगे. इस मुहिम में राज्य की मंत्री शशि पांजा भी उनके साथ खड़ी हैं. शशि पांजा ने कहा, "पहले बंगाल-विरोधी ताकतों ने बंगालियों को बांग्लादेशी कहकर पहचान मिटाने का काम किया और अब वही ताकतें अदालत के आदेश की अवहेलना कर रही हैं ताकि इन लोगों को देश में वापस नहीं लाया जा सके."