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Uttarakhand News Today in Hindi: उत्तराखंड के कोटद्वार में साल के शुरुआत में हिंदू तंजीम से जुड़े लोगों ने एक बुजुर्ग शख्स को नाम हटाने के लिए दबाव बनाया और उनके साथ बदसलूकी की. इस दौरान एक मुकामी नौजवान दीपक कुमार ने फरिश्ता बनकर मौके पर पहुंचे, और हिंदू तंजीम के कारकुनान से बुजुर्ग को बचाया. इस मौके पर उन्होंने भाईचारगी का पैगान देने के लिए अपना नाम "मोहम्मद दीपक" बताया था. इस वाकये की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वह सुर्खियों में आ गए.
हैरानी वाली बात यह है कि हिंदू तंजीमों के हंगामे के बाद उत्तराखंड इंतजामिया ने "मोहम्मद दीपक" के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया. हिंदुत्ववादी तंजीमों के मुखालिफत के बीच जिस शख्स ने इंसानियत के नाम पर एक मुस्लिम दुकानदार का साथ दिया था, उसी के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर अब मुल्क की सबसे बड़ी अदालत ने फिलहाल रोक लगा दी है. अदालत के इस अंतरिम हुक्म से दीपक कुमार को बड़ी राहत मिली है.
दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (31 अगस्त) को दीपक कुमार के खिलाफ जनवरी 2026 में दर्ज एफआईआर पर कार्रवाई रोकने का हुक्म दिया. यह मामला उन शिकायतों से जुड़ा है, जो उत्तराखंड में एक मुस्लिम बुजुर्ग दुकानदार पर नाम बदलने के दबाव बनाया गया, और ऐतराज जताने पर मुबय्यना तौर पर हिंदू तंजीमों के कारकुनान के जरिये हमला करने की कोशिश की गई थी. इसका दीपक ने बीच बचाव किया था.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दीपक कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम हुक्म दिया. दीपक ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खत्म करने से इनकार कर दिया गया था. हाईकोर्ट ने इसके साथ ही दीपक कुमार को इस मामले के बारे में सोशल मीडिया पर बात करने से रोकने का भी हुक्म दिया था.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के बाद रियासती हुकूमत को नोटिस जारी करते हुए कई अहम हुक्म दिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "मुतल्लिका एफआईआर से जुड़ी कार्यवाही और हाईकोर्ट के हुक्म के असरात व नफाज पर रोक रहेगी. अदालत ने इस मामले में उत्तराखंड सरकार से भी जवाब मांगा है.
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
इस मामले में 19 मार्च को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दीपक कुमार पर सख्त रद्दे अमल का इजहार किया था. अदालत ने कहा था कि एफआईआर को रद्द कराने के लिए याचिका दाखिल करके दीपक मुकामी पुलिस पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं.
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस राकेश थपलियाल ने कहा था कि जब एफआईआर दर्ज हो चुकी है तो पुलिस को मामले की तफ्तीश करने का मौका दिया जाना चाहिए. अदालत ने कहा था कि पुलिस को इस मामले की जांच करने की पूरी सलाहियत है और उस पर भरोसा किया जाना चाहिए. अदालत ने दीपक को मश्कूक मुल्जिम बताते हुए यह भी कहा था कि इस तरह की अर्जियां पूरी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल है.
हाईकोर्ट ने दीपक कुमार को इस मामले से जुड़ी किसी भी बात को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने या अपनी राय जाहिर करने से रोकने के लिए भी पाबंदी लगाई थी. अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम हुक्म के बाद हाईकोर्ट के उस हुक्म के अमल पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है.
दीपक कुमार पर किसने दर्ज कराया एफआईआर
इस पूरे वाकये के बाद इंतजामिया के जरिये कुल तीन मामले एफआईआर दर्ज किए गए. पहला मामला एहतिजाज में शामिल नामालूम अफराद के खिलाफ दर्ज किया गया. दूसरा मामला दुकानदार के बेटे की शिकायत की बुनियाद पर दर्ज किया गया.
तीसरा मामला दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज किया गया. यह एफआईआर कमल प्रसाद की शिकायत की बुनियाद पर दर्ज हुई थी. शिकायत में कमल प्रसाद ने दीपक कुमार और उनके साथियों पर मुबय्यना तौर पर तौहीन-आमेज लफ्जों के इस्तेमाल और तशद्दुद की धमकी देने का इल्जाम लगाया था. इसी एफआईआर को खत्म कराने के लिए दीपक कुमार ने पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी दरख्वास्त मंजूर नहीं की. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले में उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और फिलहाल दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़ी कार्यवाही पर रोक लगा दी है. साथ ही हाईकोर्ट के उस हुक्म के असर और अमल पर भी अंतरिम रोक रहेगी. मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह साफ होगा कि दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर अदालत का अंतिम रुख क्या रहता है.