Uttar Pradesh News: सहारनपुर की काष्ठ-नक्काशी को मोहम्मद दिलशाद नाम के एक फेमस काष्ठकार ने पूरी दुनिया में पहचान दिलाई है. मोहम्मद दिलशाद को हाल ही में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने शिल्प गुरु पुरस्कार-2024 से सम्मानित किया, जिससे देश के मुस्लिम समाज में खुशी का माहौल है. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.
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Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की पारंपरिक काष्ठ-नक्काशी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन से नई पहचान मिली है. इसी कड़ी में सहारनपुर के रहने वाले फेमस काष्ठकार मोहम्मद दिलशाद को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा शिल्प गुरु पुरस्कार-2024 से सम्मानित किया गया है. इस सम्मान की वजह से पूरा भारत और मुस्लिम समाज के लोग काष्ठकार मोहम्मद दिलशाद पर गर्व कर रहे हैं.
यह सम्मान न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि सहारनपुर की नक्काशी कला के लिए भी गर्व का विषय है. मोहम्मद दिलशाद पिछले पांच दशकों से ज्यादा वक्त से भारतीय पारंपरिक काष्ठ-नक्काशी के संरक्षण और संवर्धन में जुटे हैं. उन्होंने इस कला का प्रशिक्षण अपने पिता मोहम्मद इशाक से प्राप्त किया. उन्होंने पारंपरिक तकनीकों को बनाए रखते हुए नए डिजाइनों और रूपों को विकसित किया है.
मोहम्मद दिलशाद की कारीगरी आज देश-विदेश में पहचान बना चुकी है. राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू द्वारा शिल्प गुरु पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर मोहम्मद दिलशाद ने प्रधानमंत्री और सीएम योगी व केंद्र सरकार व कपड़ा एवं वस्त्र मंत्रालय का आभार जताया. उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहन से कारीगरों को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है. वर्ष 2005 में उन्हें यूनेस्को पुरस्कार, 1997 में राष्ट्रीय पुरस्कार और 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लोकमत सम्मान से भी नवाजा जा चुका है.
उनके बेटों को भी राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिल चुके हैं. दिलशाद ने सहारनपुर की नक्काशी को वैश्विक पहचान दिलाने में ओडीओपी योजना और 'लोकल से ग्लोबल' नीति को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि सरकारी मदद से हस्तशिल्प उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं, जिससे कारीगरों को उचित मूल्य और सम्मान दोनों मिल रहा है.
गौरतलब है कि मोहम्मद दिलशाद अब तक 400 से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण दे चुके हैं. उनके बनाए शिल्प कार्य भारत के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा और मिस्र जैसे देशों में प्रदर्शित हो चुके हैं। उनका यह सम्मान सहारनपुर के कारीगरों के लिए नई प्रेरणा बनकर उभरा है.