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नई दिल्ली: सहारनपुर मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के बाद अब मुरादाबाद में 40 साल पुरानी मुस्तफा मस्जिद को गिराए जाने का खतरा मंडराने लगा है. मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के नोटिस के बाद मुस्तफा मस्जिद में नामज़ अदा करने वाले नमाजियों समेत उसके ज़िम्मेदारान और पूरे मुस्लिम समाज में नाराजगी है. इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद पक्ष को मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने अवैध निर्माण बताया है. हालांकि, अफसरों का भी मानना है कि मस्जिद किसी सरकारी ज़मीन न होकर निजी ज़मीन पर है, बस इसके नक़्शे को लेकर ऐतराज है. इसे बनाने से पहले मुरादाबाद प्राधिकरण से नक्शा पास नहीं कराया गया था.
हालांकि इस मामले में एक पहलू ये भी है कि मस्जिद 40 साल पुरानी बताई जा रही है, जबकि मुरादाबाद में प्राधिकरण का गठन ही उसके बाद हुआ है. ऐसे में नक्शा पास कराने का कोई सवाल ही नहीं होता है.
जानकारों की मानें तो, हिन्दू संगठन के लोग जानबूझकर मस्जिदों को टारगेट कर उनके खिलाफ शिकायत दे रहे हैं, और प्रशासन किसी घोषित आदेश की तरह ऐसी मस्जिदों के खिलाफ नोटिस जारी कर रहा है. इस पूरे मामले को उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले आसन्न चुनाव और उसमें वोटों के ध्रुवीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है.
गौरतलब है कि मुरादाबाद की ये मस्जिद दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे-9 के किनारे बनी है. इस मुस्तफा मस्जिद को मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने अवैध बताते हुए 20 अगस्त को नोटिस जारी किया था. नोटिस का जवाब देने का वक़्त भी 3 सितंबर को खत्म हो चुका है. ऐसे में अब मस्जिद पर कार्रवाई का खतरा बढ़ गया है. बताया जा रहा है कि करीब 40 साल पहले फरीद जब्बार ने अपनी फैक्ट्री में यह मस्जिद बनवाई थी. 2025 में उनके निधन के बाद उनके बेटे जीशान फरीद ने मस्जिद के पास की संपत्ति एक निजी यूनिवर्सिटी के मालिक को बेच दी थी. हालांकि, मस्जिद में अभी भी नमाज़ अदा की जाती है.
इस मामले में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण का कहना है कि करीब 300 वर्गमीटर में बनी इस मस्जिद का निर्माण बिना नक्शा पास कराए किया गया है. इसी आधार पर इसे अवैध निर्माण बताते हुए नोटिस दिया गया है. मस्जिद के इमाम मौलाना शाने अजहरी ने बताया कि उन्हें नोटिस मिला है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी मस्जिद के प्रबंधक जीशान फरीद को है. उन्होंने कहा कि वह यहां सिर्फ नमाज़ पढ़ाते हैं.
इस मामले में सलाम टीवी ने जब मस्जिद के केयरटेकर जीशान फरीद से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने कैमरे पर बात करने से साफ मना कर दिया. दिल्ली में होने का हवाला देकर उन्होंने कहा कि इस मामले को हम कानूनी तौर पर आगे ले जा रहे हैं. हमें नोटिस मिला है, और प्रशासन से हमारी बात हुई है.
हमें वक्त दिया गया है. हम अपने तरफ से सारे दस्तावेज प्रशासन के सामने रखेंगे.
वहीं, दूसरी तरफ मस्जिद में नमाज पढ़ने आए लोगों से जब बातचीत की गई, तो उनका साफ तौर पर कहना है कि इस मस्जिद को हम पिछले 40 से 50 साल से देख रहे हैं. मस्जिद निजी जमीन पर बनी है. ऐसे में किसी को इस पर कोई ऐतराज़ नहीं है, चाहे हिंदू हो या मुसलमान?
इस मामले में मुरादाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी के वाइस चेयरमैन अनुभव सिंह ने भी कैमरे पर बोलने से साफ मना कर दिया, लेकिन उन्होंने यह कहा कि हमें चार लोगों की तरफ से एक कंप्लेंट दी गई थी कि यह मस्जिद अवैध है जिसको लेकर सचिव ने मस्जिद प्रबंधक को नोटिस जारी किया है. हमारा कोई इरादा किसी तरह की अशांति फैलाना नहीं है. कानूनी रूप से जो कार्रवाई बनती है, हम वह करेंगे. हमारे पास मस्जिद प्रबंधक के लोग आए थे. उन्होंने अपनी बात रखी और कुछ वक्त मांगा है. हमने उन्हें वक्त दिया है अपनी बात रखने के लिए.
मस्जिद कोई सरकारी जमीन पर नहीं है. एमडीए ने सिर्फ नक्शा पास न होने को लेकर नोटिस जारी किया है. अगर यह मस्जिद अथॉरिटी बनने से पहले की है तो मामला अपने आप ही खारिज हो जाता है. हम इसकी जांच कर रहे हैं.
इस मामले में पूर्व सांसद मुरादाबाद एस टी हसन ने कहा, "हमने सहारनपुर में भी देखा की मस्जिदों किस तरीके से बुलडोजर कार्रवाई करके गिरा दी गई रात के अंधेरे में. आपको पता है चुनाव करीब है. मुद्दे सरकार के पास नहीं है. इसलिए हिंदू-मुसलमान करके इस तरीके का माहौल बना रही है. मुरादाबाद के लोग अमन पसंद लोग हैं हमको आपस में भाईचारा बना के रखना है.