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Moradabad News Today: उत्तर प्रदेश में मुस्लिम कारोबारी चाहे, वह किसी भी पेशे में हो, इस समय निशाने पर हैं. उनके कारोबार को बंद कराने और उन दुकानों से सामान न खरीदने के लिए लगातार बहुसंख्यक समुदाय के लोगों अपील की जा रही है. अब कुछ लोगों के निशाने पर हैं मुरादाबाद के मुस्लिम बैंड संचालक और उनकी मंशा को कामयाबा बनाने के लिए स्थानीय पुलिस हर संभव कोशिश कर रही है.
दरअसल, मुरादाबाद में पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के बैंड संचालकों को अपने बैंड के नामों से हिंदू देवी-देवताओं के नाम हटाने का निर्देश दिया है. यह कदम एक शिकायत के बाद उठाया गया, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम बैंड संचालक 'मां दुर्गा, शिव बैंड' जैसे हिंदू धार्मिक नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं.
इस संबंध में बीते 9 जुलाई को इसकी शिकायत शैबी शर्मा नाम के स्थानीय शख्स ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर की थी, जो पेशे से एक वकील है. शैबी शर्मा ने अपनी शिकायत में दावा है कि जिले में बड़ी संख्या मुस्लिम बैंड संचालक ऐसे नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो हिंदू धर्म से जुड़े हैं. शिकायतकर्ता ने इसे धार्मिक पहचान के दुरुपयोग का मामला बताया है.
सत्य खबर में छपी खबर के मुताबिक, शिकायतकर्ता शैबी शर्मा ने दावा किया कि मुरादाबाद में करीब 500 से ज्यादा बैंड बाजे वाले हैं, जिनमें बड़ी संख्या मुस्लिमों की है. मुस्लिम बैंड वाले हिंदू नामों से अपना कारोबार करते हैं. शैबी के मुताबिक, इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है और कार्रवाई के आदेश दिए हैं, जो कानूनी रुप से बिल्कुल सही है. हिंदू नाम और पहचान की आड़ में दूसरे धर्म के लोग इस तरह कारोबार नहीं कर सकते हैं, यह धार्मिक संवेदनशीलता के खिलाफ है.
मुख्यमंत्री पोर्टल पर मिली शिकायत बाद मुराबाद पुलिस भी हरकत में आ गई. मुरादाबाद के एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने संबंधित मुस्लिम बैंड संचालकों को तलब कर लिया और उन्हें अपने बैंड का नाम बदलने का तुगलकी फरमान सुना दिया. इस दौरान पीड़ितों की एसपी सिटी ने एक नहीं सुनी. पुलिस के मुताबिक, सभी बैंड मालिकों ने इस आदेश का पालन करने की सहमति दी है, हालांकि उन्होंने नाम बदलने के लिए कुछ समय मांगा है.
दिलचस्प बात यह है कि मुरादाबाद पुलिस आम तौर पर छोटी से छोटी कार्रवाई को भी अपने एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल पर शेयर करती है, लेकिन इस बैठक और निर्देश की कोई जानकारी सोशल मीडिया पर नहीं दी गई. भले ही इसकी जानकारी नहीं दी गई, लेकिन मुरादाबाद के एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह के तुगलकी फरमान को कई समाचर पत्रों और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रमुखता से पब्लिश की गई. जिसके बाद एक बार फिर से मुसलमानों की सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा सुर्खियों में आ गया.
बता दें, इससे पहले उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों में मुसलमानों को अपनी दुकानों पर नाम लिखने और हिंदू नाम न रखने को लेकर निशाना बनाया गया है. दक्षिणपंथी संगठनों के इस गैर कानूनी मांग को पूरा करने और उन्हें बढ़ावा देने में शासन प्रशासन ने महती भूमिका निभाई. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हाल ही में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां मुस्लिम समुदाय को धार्मिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है.
कांवड़ यात्रा, रक्षा बंधन जैसे पवित्र त्योहारों और अवसरों के नाम पर मुस्लिम दुकानदारों, कारीगरों और बैंड संचालकों को निशाना बनाया जा रहा है. इस बहिष्कार ने न सिर्फ उनके आर्थिक हितों को चोट पहुंचाई है बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की जड़ें भी हिलाने की कोशिश की है.
मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और अन्य जिलों में कांवड़ यात्रा के मार्ग पर दुकानों, ढाबों और रेस्तरां मालिकों को अपने नाम की नेमप्लेट लगाने का आदेश दिया गया. हालांकि, आदेश का मूल उद्देश्य पारदर्शिता हो सकता था, लेकिन इसे मुस्लिम दुकानदारों के खिलाफ 'थूक जिहाद' जैसे गलत और नफरत भरे दावों के साथ जोड़ा गया. कुछ हिंदू संगठनों ने इसका उपयोग मुस्लिम समुदाय के आर्थिक बहिष्कार के लिए किया.
हरिद्वार में मुस्लिम कारीगरों के जरिये कांवड़ बनाने पर प्रतिबंध की मांग ने धार्मिक सौहार्द को बुरी तरह प्रभावित किया. इसने कारीगरों को झकझोर कर रख दिया और सालों से इस कारोबार से जुड़े लोगों की रोजी रोटी को लेकर नई समस्या खड़ी हो गई. मुस्लिम कारीगर दशकों से इस काम में लगे हुए हैं और उनकी मेहनत से जुड़े लोग भी गुजर-बसर करते हैं.
इसकी मांग सबसे पहले स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि (जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर) और स्वामी यशवीर ने उठाई थी. दोनों संतों ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर मुस्लिम कारीगरों जरिये बनाई गई कांवड़ों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी. उन्होंने दावा किया था कि ये कांवड़ "अशुद्ध" होती हैं. इस अभियान ने सामाजिक तनाव को बढ़ाया और विवाद का वजह बना. इसने दो समुदाय के बीच खाई पैदा करने का काम किया.
बागपत में रक्षा बंधन के मौके पर मुस्लिम दुकानदारों से राखी न खरीदने की अपील ने भी गहरी चोट पहुंचाई. साध्वी प्राची ने रक्षा बंधन के मौके पर बागपत में मुस्लिम दुकानदारों से राखी और मिठाई न खरीदने की अपील की थी. साध्वी प्राची ने चांद-सितारे वाली राखियों को 'त्योहार जिहाद, राखी जिहाद' बताया था. जिसमें दावा किया गया कि मुस्लिम दुकानदार इन राखियों के जरिए हिंदू त्योहार की पवित्रता को नष्ट करने की साजिश रच रहे हैं. साध्वी प्राची के मुताबिक हिंदू औरतों से सिर्फ हिंदू दुकानदारों से राखी खरीदने की अपील की.