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MP News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक हिंदू-मुस्लिम युवा युवती के साथ रहने के मामले में माता-पिता की कस्टडी की रिक्वेस्ट खारिज कर दी है. कोर्ट ने लड़की के माता-पिता की अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें साथ रहने की बात कही है. याचिका पर कोई भी ऑर्डर पास करने से मना करते हुए, संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा कि लड़की बालिग है और अपनी मर्ज़ी से अपने माता-पिता के घर नहीं लौटना चाहती,
डिवीजन बेंच का यह फैसला 14 नवंबर को हाई कोर्ट की एक और डिवीजन के उस फैसले का बाद आया है जिसमें बेंच ने लड़की को बिना शादी के उसके मुस्लिम पार्टनर के साथ रहने की इजाज़त देने से मना कर दिया था और उसे जबलपुर के एक डे-स्टॉप सेंटर में भेज दिया था.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अभी देनों ने शादी नहीं की है. इसलिए लड़के साथ रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. उसे सेफ कस्टडी में जबलपुर के वन स्टॉप सेंटर ले जाया जाए.
इसके बाद मंगवार को यह मामला चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच के सामने पेश किया गया था. महिलाने अपने बयान को दोहराया और माता-पिता के साथ न जाने के लिए कहा. इसके साथ ही उसने यह भी कहा कि उसने कुछ दस्तावेज़ अभी भी माता-पिता के साथ हैं.
कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा गया कि चूंकि लड़की बालिग है और किसी गलत तरीके से कैद में नहीं है और अपनी मर्ज़ी से अपने माता-पिता के घर नहीं लौटना चाहती, इसलिए याचिका में किसी और ऑर्डर की ज़रूरत नहीं है. दरअसल, चीफ जस्टिस की बेंच के सामने लड़की ने एक बार फिर अपनी बात दोहराई कि वह अपनी मर्ज़ी से अपने माता-पिता का घर छोड़कर गई थी.