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Munawwar Rana Birthday: "किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकान आई, मैं घर में सबसे छोटा था—मेरे हिस्से में मां आई." यह शेर सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उस शायर का पूरा जीवन का फलसफा है, जिसने 'मां' को उर्दू शायरी के सबसे ऊंचे मुकाम पर पहुंचा दिया. यह शायर थे- अपनी खास आवाज, सादगी और असरदार अंदाज़ के लिए मशहूर मुनव्वर राणा.
26 नवंबर 1952 को रायबरेली में जन्मे मुनव्वर राणा का बचपन बेहद कठिन हालात में गुजरा. गरीबी ऐसी थी कि घर में कभी चूल्हा जलता, कभी नहीं. पिता ट्रक चलाने का काम करते थे. दूसरी ओर, मां अकेले घर की जिम्मेदारियां संभालती थीं. टाट के पर्दे से घर ढंकना, बच्चों को संस्कार देना, सब उन्हीं के कंधों पर था. इन्हीं हालातों ने मुनव्वर राणा के भीतर 'मां' के लिए वह गहरा प्यार पैदा किया, जो आगे चलकर उनकी शायरी की पहचान बन गया.
एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि बचपन में उन्हें नींद में चलने की आदत थी, जिससे डरकर उनकी मां रातभर कुएं के पास बैठती थीं, ताकि उनका बेटा कहीं गिर न जाए. मां रातभर रोती रहती थीं और कुएं से कहती थीं .मेरे बेटे को कुछ मत कहना, ये मेरा इकलौता बेटा है." यहीं से 'मां' के साथ वह भावनात्मक रिश्ता गहराता गया और उनकी कलम से ऐसे शेर निकले जिन्होंने करोड़ों दिलों को छुआ.
लबों पर उसके कभी बददुआ नहीं होती,
बस एक मां है जो कभी खफा नहीं होती
2014 में मुनव्वर राणा को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. लेकिन जैसे-जैसे प्रसिद्धि बढ़ी, उनके बयान सियासत के घेरे में आने लगे. किसान आंदोलन पर टिप्पणी, राम मंदिर को लेकर सवाल, और फ्रांस में शिक्षक की हत्या पर दिया तथाकथित विवादित बयान. ये सभी बातें उन्हें लगातार विवादों में धकेलती रहीं. 2015 में असहिष्णुता बढ़ने का हवाला देकर उन्होंने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिया.
विवादों ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि उनकी शायरी और गहरी हो गई. मुनव्वर लिखते हैं, 'सिरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जां कहते हैं, हम तो इस मुल्क की मिट्टी को मां कहते हैं.' जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, उनकी कविताओं में दर्द और अनुभव की परतें और उभरने लगीं. दिसंबर 2022 में उन्होंने लिखा था,'बहुत पानी बरसता है तो मिट्टी बैठ जाती है, न रोया कर, बहुत रोने से छाती बैठ जाती है.'
यह पंक्तियां मानो उनके भीतर की थकान का बयान थीं. 14 जनवरी 2024 को मुनव्वर राणा का निधन हो गया. उनकी आवाज भले खामोश हो चुकी है, मगर उनकी शायरी- खासतौर पर 'मां' के लिए लिखी पंक्तियां- हमेशा उर्दू अदब के दिल में जिंदा रहेंगी.