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Punjab Flood News: पंजाब में बाढ़ की वजह से भारी तबाही मच गई है. लोगों के घर, दुकान, खेत-खलियान सब बाढ़ के पानी में बरबाद हो गए हैं. इस बीच इंसानियत की मिसाल कायम करते हुए मुस्लिम संगठनों और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पंजाब में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पहले सफ में खड़े हुए. इतना ही नहीं इस अभियान में उलेमा-ए कराम के साथ-साथ मदरसे के छोटे-छोटे बच्चों ने भी हिस्सा लिया.
सोशल मीडिया पर जहां हमेशा नकारात्मकता फैली रहती है. इस आपदा के मौके पर बाढ़ पीड़ितों की मदद करते लोगों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें मदरसे के छोटे-छोटे बच्चे अपने मिट्टी के गुल्लक तोड़कर जमा किए हुए पैसों को बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए दे रहे हैं. इस वीडियो के बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मदरसे को लेकर और वहां की शिक्षाओं को लेकर हमेशा सवाल उठाए जाते हैं. आज यह देश को साफ दिख रहा है कि मदरसों में बच्चों को क्या तालीम दी जाती है.
मदरसों में अलगाववाद नहीं भाईचारे की दी जाती है शिक्षा
लोग मदरसों के बच्चों की जज्बे की तारीफ कर रहे हैं. हमेशा से मदरसे को बदनाम करने के लिए उनपर कट्टरता और अलगाववादी विचारधारा फैलाने का इल्जाम लगाया गया. लेकिन पंजाब में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जिस गति से मदरसे के उलेमा-ए कराम ने अभियान चलाया, उससे यह साबित होता है कि मदरसों में अलगाव नहीं बल्कि भाईचारा सिखाया जाता है.
लोकेशन : पानीपत,हरियाणा
मदरसे के ग़रीब और यतीम बच्चों ने अपने गुल्लक तोड़कर पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राहत सामग्री एकत्रित की। pic.twitter.com/p35AGD4M4Z
— The Muslim (@TheMuslim786) September 9, 2025
बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए महिलाओं ने दिए अपने गहने
इससे पहले भी जमीयत उलेमा ए हिंद से जुड़े पदाधिकारियों ने मीटिंग कर 10 लाख रुपये नकद इकट्ठा करने और बाढ़ पीड़ितों की मदद करने का ऐलान किया था. उलेमा-ए कराम ने बयान जारी कर कहा कि सिख समुदाय के लोग हमारे भाई हैं और मुसीबत के वक्त में उनकी मदद करना सवाब का काम है. जमीयत की टीम ने गांव और कस्बों में जाकर बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए चंदा भी किया, जहां मुस्लिम महिलाओं ने अपने गहने दिए और मर्दों ने अनाज और पैसे से मदद की. आपदा के वक्त पंजाब में मदद पहुंचाने पर मुस्लिम समुदाय की जमकर तारीफ हो रही है.