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Sambhal Jama Masjid Report: उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी थी. इस हिंसा में 5 लोगों की मौत हो गई थी. इस हिंसा को लेकर एक न्यायिक रिपोर्ट तैयार की गई है, जिस पर राजनीतिक बवाल मच गया है. लोग इस रिपोर्ट पर सवाल उठा रहे हैं. इसी कड़ी में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया और इसे पक्षपातपूर्ण करार दिया है.
शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जामा मस्जिद का निर्माण हरिहर मंदिर को तोड़कर कराया गया था, जबकि यह पूरी तरह ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है. उन्होंने बताया कि मस्जिद का निर्माण 1525 ईस्वी में बाबर के शासनकाल में शुरू हुआ और 1530 में मुकम्मल हुआ. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाबर ने इस निर्माण की देखरेख के लिए एक हिंदू अधिकारी को नियुक्त किया था. ऐसे में यह कहना पूरी तरह गलत है कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया था.
मौलाना ने साफ शब्दों में कहा कि इस मस्जिद के इतिहास से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि दिन के उजाले में संभल के शाही जामा मस्जिद के साथ नाइंसाफी की जा रही है. देश की एकता और अखंडता के लिए हम हर कुर्बानी देने को तैयार हैं, लेकिन मस्जिद के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. यह मस्जिद थी, है और कयामत तक मस्जिद ही रहेगी.
कैसे लीक हुई रिपोर्ट?
साथ ही उन्होंने इस पर भी आपत्ति जताई कि रिपोर्ट के कुछ अंश मीडिया में लीक हो गए, जबकि नियमों के मुताबिक कोई भी रिपोर्ट शासन को बंद लिफाफे में सौंपी जाती है. मौलाना ने सवाल उठाया कि अगर रिपोर्ट बंद लिफाफे में सौंपी गई थी तो फिर इसके कुछ हिस्से सार्वजनिक कैसे हुए? उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब जानबूझकर माहौल बिगाड़ने और मुस्लिम समाज को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है.