Kerala Muslims on Waqf Amendment Act: बीते 5 अप्रैल को वक्फ संशोधन बिल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी. इस बिल को लेकर पूरे देश में विरोध देखने को मिल रहा है. कई सियासी दलों ने वक्फ संशोधन एक्ट की वैधानिकता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. इसको लेकर केरल में भी भारी विरोध देखने को मिल रहा है.
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Kerala News Today: केरल में मुस्लिम संगठनों ने राज्य की वामपंथी सरकार और विपक्षी दलों से एक संयुक्त प्रस्ताव पारित करने का आह्वान किया है, जिसमें यह कहा जाए कि राज्य में विवादास्पद वक्फ संशोधन अधिनियम लागू नहीं किया जाएगा. मुस्लिम संगठनों का कहना है कि राज्य को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ऐसा करना चाहिए.
दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि वह अपने राज्य में इस अधिनियम को लागू नहीं करेंगी, जबकि तमिलनाडु विधानसभा ने संसद के जरिये पारित किए जाने से पहले ही केंद्र से वक्फ संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी ऐलान किया है कि उनकी पार्टी द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी.
साउथ केरल जमीयतुल उलमा के महासचिव टी. मुहम्मद कुंजी मौलवी ने गुरुवार (10 अप्रैल) को मीडिया से बातचीत में कहा, "तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन पहले ही ऐलान कर चुके हैं और उनकी विधानसभा ने वक्फ संशोधन अधिनियम के कार्यान्वयन के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया है. हम मांग करते हैं कि केरल सरकार भी ऐसा प्रस्ताव पारित करे."
हाल ही में पारित कानून के विरोध में गुरुवार को केरल में राजभवन तक मार्च निकालने वाले कई अन्य मुस्लिम संगठनों ने भी यही मांग की है. मुस्लिम नेताओं ने इस संशोधन को "देश से मुसलमानों को मिटाने" और उनकी सभी संपत्तियों को जब्त करने की कोशिश बताया है. केरल मुस्लिम जमात फेडरेशन के अध्यक्ष मौलवी कडक्कल अब्दुल अजीज ने कहा, "इस देश में आखिरी मुसलमान की मौत तक हम इस लोकतंत्र विरोधी कानून को लागू नहीं होने देंगे. हमारा राजभवन मार्च सिर्फ शुरुआत है और हम संसद तक एक विशाल विरोध रैली भी आयोजित कर सकते हैं."
बता दें, बीते 3 अप्रैल को लोकसभा में पक्ष और विपक्ष की मैराथन बैठक के बाद वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो गया, लोकसभा में बिल के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े. इसके अगले दिन यानी 4 अप्रैल की देर रात यह बिल राज्यसभा में भी पारित हो गया. राज्यसभा में बिल के पक्ष में 128 और विरोध में महज 95 वोट पड़े. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को इस बिल को मंजूरी दे दी, जिसके बाद यह वक्फ बिल कानून बन गया. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब तक 10 से ज्यादा याचिकाएं डाली जा चुकी हैं.
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