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SC on Muslim Owner Property: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी संपत्ति को बेचने का केवल 'एग्रीमेंट टू सेल' करने से उस प्रोपर्टी की ऑनरशिप राइट्स ट्रांसफर नहीं होते हैं. अदालत ने साफ किया कि किसी शख्स की मौत के बाद उसकी छोड़ी गई सभी संपत्तियां एक मरे हुए शख्स की छोड़ी हुई प्रोप्रटी ही मानी जाएगी और उनका बंटवारा मुस्लिम कानूनॉ के अनुसार किया जाएगा.
यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सुनाया है. अदालत ने निचली अदालत के अंग्रेजी अनुवाद की खराब गुणवत्ता पर भी सख्त नाराजगी जताई और कहा कि कानूनी मामलों में अनुवाद सटीक और मूल भावना को दर्शाने वाला होना चाहिए ताकि अपील की सुनवाई में न्याय हो सके.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा,"मामले को निपटाने से पहले हम यह दर्ज करना चाहते हैं कि सिविल कोर्ट के फैसले का अंग्रेजी अनुवाद जिस तरह से किया गया, उससे हम असंतुष्ट हैं. कानून के मामलों में शब्दों का बहुत महत्व होता है. हर शब्द, हर कॉमा पूरे फैसले की समझ को प्रभावित करता है."
यह मामला चांद खान नामक व्यक्ति की संपत्तियों को लेकर पारिवारिक विवाद से जुड़ा है, जिनकी मृत्यु बिना संतान के हुई थी. उनकी पत्नी जोहरबी ने संपत्ति में तीन-चौथाई (3/4) हिस्से का दावा किया, यह कहते हुए कि यह संपत्ति मुस्लिम कानून के तहत 'मतरुका संपत्ति' है.
वहीं, चांद खान के भाई इमाम खान ने इस दावे का विरोध किया. उन्होंने कहा कि चांद खान ने अपनी संपत्तियां जीवनकाल में ही दूसरों को 'एग्रीमेंट टू सेल' के जरिए बेच दी थीं.
जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संपत्ति बेचने का एग्रीमेंट किसी व्यक्ति को कोई अधिकार नहीं देता और न ही उससे खरीदार को उस संपत्ति में कोई कानूनी हित मिलता है. यह कानून में स्पष्ट रूप से कबूल किया गया सिद्धांत है.
अदालत ने पाया कि चांद खान के जीवनकाल में कोई सेल डीड साइन नहीं हुई थी, बल्कि सभी सेल डीड उनकी मृत्यु के बाद बनीं, इसलिए संपत्ति उनकी मृत्यु के समय तक उन्हीं के नाम पर थी. इसलिए यह संपत्ति 'मतरुका संपत्ति' मानी जाएगी और मुस्लिम उत्तराधिकार कानून के तहत बंटेगी.
जस्टिस करोल ने अपने फैसले में लिखा,"जिस प्रोपर्टी के लिए एग्रीमेंट टू सेल किया गया था, वह उस समय तक चांद खान की ही संपत्ति थी और इसलिए उसका बंटवारा लागू कानून के अनुसार किया जाएगा." अदालत ने कहा कि 'मतरुका' शब्द अरबी भाषा से लिया गया है,
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मुस्लिम कानून के मुताबिक, यदि मरने वाले शख्स की कोई संतान नहीं है, तो पत्नी को एक-चौथाई (1/4) हिस्सा मिलेगा, और यदि संतान है, तो एक-आठवां (1/8) हिस्सा.