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Uttar Pradesh News: मुस्लिम समुदाय का महत्वपूर्ण त्योहार बकरीद नजदीक है, इस बीच सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक प्रोग्राम में भाषण देते हुए कहा कि यूपी में सड़कों पर नमाज नहीं होती है. इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि सड़कें नमाज पढ़ने के लिए तमाशा बनाने के लिए नहीं है. उन्होंने लोगों को संख्या ज्यादा और जगह कम होने पर शिफ्ट में नमाज पढ़ने की नसीहत दी है. उन्होंने चेतावनी दी है कि प्यार से मानेंगे तो सही है नहीं तो दूसरा रास्ता अपनाया जाएगा. योगी के इस बयान पर सियासी बखेड़ा खड़ा हो गया है. ऑल मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये भाषा किसी सूबे के मुख्यमंत्री की नहीं लगती बल्कि किसी सड़कछाप की लगती है.
सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर मुख्यमंत्री योगी के बयान पर तीखा हमला बोलते हुए ऑल मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि फिर सभी धार्मिक यात्राओं पर बैन लगा दें. उन्होंने आगे कहा कि कांवड़िए भी तो सड़क पर चलते हैं, ऐसा नहीं हो सकता कि एक समुदाय के ऊपर बैन होगा और दूसरा समुदाय यात्रा निकालेगा.
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी ने सोमवार (18 मई) को एक प्रोग्राम में बयान देते हुए उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज न होने की बात कही. उन्होंने कहा कि लोग मुझसे पूछते हैं कि यूपी की सड़कों पर नमाज नहीं होती, मैं कहता हूं कतई नहीं, आप जाकर देख लो. उन्होंने आगे कहा, " अरे सड़कें चलने के लिए हैं या कोई भी व्यक्ति आकर चौराहे पर तमाशा बना देगा, क्या अधिकार है उसे सड़क रोकने का, आवागमन बाधित करने का उसे कौन सा अधिकार है."
सीएम योगी ने आगे कहा, उन्होंने (मुस्लिम समुदाय) मुझसे कहा कि कैसे होगा (नमाज) हमारी संख्या ज्यादा है तो मैंने कहा शिफ्ट में कर लो." योगी ने कहा, "तुम्हारे घर में संख्या नहीं है तो संख्या नियंत्रित कर लो और सामर्थ नहीं है तो क्यों आगे संख्या बढ़ाए जा रहे हो." उन्होंने कहा कि नमाज पढ़ना जरूरी है तो शिफ्ट में पढ़िए हम उसको रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नमाज नहीं, सड़क चरलने के लिए हैं.
उन्होंने चेतावनी दी कि प्यार से मानेंगे तो ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे. हमारा काम संवाद बनाना, आप संवाद से मानोगे तो संवाद से नहीं तो संघर्ष करके देख लो. बरेली में कई लोगों ने हाथ आजमाने की कोशिश कि तो देख ली ताकत. दरअसल, "I Love Muhammad" अभियान के दौरान बरेली में मुस्लिम समुदाय और पुलिस-प्रशासन के बीच संघर्ष हुआ था, जिसमें पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के प्रदर्शनकारियों पर बुरी तरह लाठियां चलाई थीं और लगातार बुलडोजर कार्रवाई और गिरफ्तारियों का सिलसिला चला था.