Phd Admission Cancelled Case in JMI: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के AJK-MCRC में PhD 2025–26 एडमिशन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. UGC-NET क्वालिफाइड मुस्लिम छात्र का चयन होने के बावजूद बिना लिखित आदेश उसका एडमिशन रद्द कर दिया गया. अब पीड़ित छात्र ने इसे गैरकानूनी बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
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Jamia Millia Islamia News: राजधानी दिल्ली में स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) में आए दिन छात्रों के जरिये अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन के लिए सुर्खियों में रहा है.लेकिन हालिया दिनों जामिया मिल्लिया इस्लामिया में कथित एकेडमिक लापरवाही, प्रशासनिक नाकामी और मनमानी की खबरें सामने आई हैं. इसकी वजह से ऐतिहासिक यूनिवर्सिटी की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं. बीते साल यूनिवर्सिटी के कैमिस्ट्री डिपार्टमेंट में एक Phd रिसर्च स्कॉलर नरेंद्र कुमार को उसके गाइड अमित कुमार ने कथित तौर पर आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया और लाखों रुपये वसूले, जिससे छात्र की जान चली गई.
वहीं, अब जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अनवर जमाल किदवई मॉस कम्यूनिकेशन रिसर्च सेंटर (AJK-MCRC) में 2025-26 के Phd सेशन में एडमिशन में धांधली करने, एक मुस्लिम छात्र का गैर-कानूनी और मनमाने ढंग से एडमिशन कैंसल करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. JMI प्रशासन के इस रवैये से निराश पीड़ित छात्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई है.
मिली जानकारी के मुताबिक, UGC-NET क्वालिफाइड मुस्लिम रिसर्च स्कॉलर ने याचिका में आरोप लगाया गया है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जो एक संवैधानिक रूप से संरक्षित अल्पसंख्यक संस्थान है, ने उसे PhD Programme (Academic Session 2025–26) में गैरकानूनी तरीके से दाखिला देने से मना कर दिया. साथ ही यह भी कहा गया है कि जामिया ने अपनी PhD एडमिशन प्रक्रिया में मुस्लिम अल्पसंख्यक आरक्षण को न तो साफ तौर पर बताया और न ही उसे सही तरीके से लागू किया.
पीड़ित छात्र के मुताबिक, उसने UGC-NET Exempted Category के तहत अनवर जमाल किदवई मॉस कम्यूनिकेशन रिसर्च सेंटर में PhD के लिए चयनित हुआ था. JMI के जरिये बीते साल 19 दिसंबर 2025 को जारी Phd की फाइनल सेलेक्शन लिस्ट में भी शामिल था. इतना ही नहीं, इसके बाद विभाग की तरफ से छात्र के दस्तावेजों का सत्यापन किया गया और फिर उसका रिसर्च प्रपोजल भी विभाग ने मंजूर कर लिया.
संबंधि विषय पर रिसर्च के लिए पीड़ित छात्र को JMI प्रशासन की तरफ से औपचारिक रूप से सुपरवाइजर भी अलॉट कर दिया गया. हालांकि, छात्र की यह खुशी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रही है. लास्ट स्टेड में JMI ने कथित तौर पर बिना किसी लिखित आदेश, बिना कोई नोटिस दिए और बिना कोई सुनवाई किए उसका एडमिशन रोक दिया. याचिका में इसे पूरी तरह से 'ड्यू प्रोसेस' और संवैधानिक सुरक्षा का उल्लंघन बताया गया है.
इस संबंध में जब जी मीडिया की टीम ने अनवर जमाल किदवई मॉस कम्यूनिकेशन रिसर्च सेंटर की डायरेक्टर प्रोफेसर सबीना से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने जवाब नहीं दिया. इसके बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार प्रोफेसर महताब आलम रिजवी और मीडिया कॉर्डिनेटर सायमा सईद से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया. जब टीम ने फोन से संपर्क किया, उस समय महताब आलम रिजवी का फोन व्यस्त था, लेकिन इसके बाद जब दोबार कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की गई तो उन्होंने रिसीव नहीं किया.
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