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Diwali News: दीपावली के अवसर पर देश और दुनिया भर में करोड़ों रुपये के पटाखे फोड़े जाते हैं. इस दौरान समाज को हिस्सों में बंटा नजर आता है. कुछ लोग दीपावली के अवसर पर पटाखे न फोड़ने की हिदायत देते हैं और पर्यावरण को बचाने की बात करते हैं. वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि सिर्फ पटाखे फोड़ने से पर्यावरण दूषित नहीं होता, इसलिए दीपावली पर पटाखे फोड़ने से रोकना सही नहीं है.
इसी कड़ी में पुरानी दिल्ली के मुस्लिम इलाकों में अन्य उलेमा-ए-कराम की तरफ से मुस्लिम समाज को दीपावली के अवसर पर पटाखे न फोड़ने की अपील की गई और लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई है. दरअसल, पिछले कुछ सालों से पुरानी दिल्ली के इलाके में खासकर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में दीपावली के अवसर पर पटाखे फोड़ने का चलन बढ़ा है.
यहां दीपावली के अवसर पर लाखों रुपये के पटाखे फोड़े जाते हैं. इन सब के बीच उलेमा-ए-कराम की ओर से दीपावली के अवसर पर पटाखे न फोड़ने को लेकर मुस्लिम समाज से अपील की गई है. उलेमा-ए-कराम ने पटाखे फोड़ने को नजायज बताया और मुस्लिम समाज को इस काम से बचने की अपील की है.
मौलाना कासिम नूरी ने इस मुद्दे पर कहा कि पटाखे फोड़ने से एयर पॉल्यूशन खतरनाक रूप से बढ़ता है, जो बुज़ुर्गों, बच्चों और बीमारों के लिए बहुत नुकसानदायक है. उन्होंने कहा कि कुछ मुस्लिम इलाकों में युवा पटाखे फोड़ते हैं, जो शरियत के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि पटाखे फोड़ने से कानून भी मना करता है और शरियत के हिसाब से भी हराम है.
उन्होंने पटाखे फोड़ने को हराम बताते हुए तर्क दिया कि पटाखे फोड़ना फिजूलखर्ची है और इससे बीमार व्यक्तियों की तकलीफ बढ़ती है, पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है, इस्लाम में इंसानों, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं देती, इसलिए पटाखे फोड़ना हराम है. इस मुद्दे पर मौलाना जियाउल्लाह कासमी ने अफसोस जताते हुए कहा कि कुछ मुस्लिम युवा, खासकर त्योहारों के दौरान, न सिर्फ़ हिंसा करके कानून तोड़ते हैं, बल्कि अपने धर्म की शिक्षाओं के भी खिलाफ़ काम करते हैं.