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Delhi News: असम के रहने वाले एक मुस्लिम नौजवान को मुस्लिम होने की वजह से नौकरी में भेदभाव का सामना करना पड़ा. पीड़ित मुस्लिम नौजवान का नाम शमीम यार है, जो एक मैकेनिकल इंजीनियर है. उन्होंने इल्जाम लगाते हुए कहा कि नौकरी की भर्ती के एक HR अधिकारी ने धर्म के आधार पर भेदभाव किया और परेशान किया.
पीड़ित शमीम यार ने बताया कि HR अधिकारी ने शमीम से सीधे उनके धर्म के बारे में पूछकर उसे परेशान किया. शमीम यार ने कहा कि HR अधिकारी ने उन्हें पहले महीने से ही 18 हजार रुपये वेतन देने का आश्वासन दिया और कुछ दिन बाद नौकरी ज्वाइन करने को कहा गया. शमीम ने आगे बताया कि HR अधिकारी ने उनसे सीधे पूछा कि आपका धर्म क्या है. शमीम ने HR अधिकारी को बताया कि वह मुस्लिम है. इस जवब के तुरंत बाद कहा गया कि कोई पद खाली नहीं है. जबकि, कुछ ही मिनट पहले वही HR अधिकारी शमीम को जॉइनिंग के लिए बुला रहे थे.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सिलचर स्थित बिहार रेलवे स्टेशन यार्ड की एक यूनिट में मैकेनिकल इंजीनियर के पद के लिए, Indeed ने एक नौकरी के विज्ञापन में, कुछ असाधारण परिस्थितियों को शामिल किया था, जैसे कि उम्मीदवार जन्म से बंगाली और मूल भारतीय होना चाहिए और उसे तीन प्रमुख भाषाओं में पारंगत होना चाहिए.
शमीम ने आगे कहा, "यह मेरे कौशल, योग्यता या अनुभव का मामला नहीं था, यह विशुद्ध रूप से धर्म का मामला था. ऐसी घटनाएँ न केवल अनैतिक हैं, बल्कि रोजगार में समान अवसरों के सिद्धांत का भी उल्लंघन करती हैं, जिसकी गारंटी हमारे संविधान में दी गई है. भर्ती प्रतिभा और योग्यता के आधार पर होनी चाहिए, न कि जाति, धर्म या पहचान के आधार पर.
शमीम ने कंपनियों और मानव संसाधन पेशेवरों से अपनी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और विविधता का सम्मान सुनिश्चित करने का आग्रह किया. उन्होंने यह भी कहा कि अगर सबूत उपलब्ध कराए जाते हैं, तो Indeed जैसे जॉब प्लेटफॉर्म ऐसे मामलों की जाँच करेंगे.