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Kasganj News Today: उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को लगातार हिंदूवादी संगठन प्रतिबंधित मांस और धार्मिक पहचान की वजह से निशाना बना रहे हैं. बीते दिनों प्रदेश के कासगंज जिले में भी विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल (Bajrang Dal) के कार्यकर्ताओं का तांडव देखने को मिला, जब उन लोगों प्रतिबंधित मांस ले जाने के शक में एक मुस्लिम नौजवान के बेरहमी से पिटाई कर दी.
इस घटना की सूचना मिलते ही सोरों थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़ित मुस्लिम नौजवान को हिरासत में लेकर थाने ले आई, जबकि उसके पास से बरामद मांस को जांच के लिए भेज दिया है. मुस्लिम नौजवान के पिटाई की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें देखा जा सकता है कि वीएचपी और बजरंग दल के कई नेता पीड़ित की बेरहमी से पिटाई कर रहे हैं.
पीड़ित मुस्लिम नौजवान की पहचान हसनैन पुत्र मंसूर निवासी चामुंडा गेट, कासगंज के रुप में हुई. पीड़ित से मारपीट के आरोप में जब सोरों पुलिस ने वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज किया तो वह भड़क गए. हिंदू संगठन के लोगों ने थाने पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग करने लगे.
दरअसल, इतवार (3 अगस्त) को कासगंज जिले के मल्लाह नगर गांव के पास गांव वालों और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हसनैन नाम के नौजवान को मांस से भरा थैला ले जाते हुए पकड़ लिया. बजरंग दल और वीएचपी कार्यकर्ताओं ने नौजवान से पूछताछ शुरू कर दी और शक होने पर पीड़ित की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी.
इस घटना की सूचना मिलते ही सोरो थाना प्रभारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और हिंदू संगठनों से पीड़ित मुस्लिम नौजवान को छुड़ाया. बजरंग दल और वीएचपी कार्यकर्ताओं की पिटाई से हसनैन गंभीर रुप से घायल हो गया था,जिसकी वजह से पुलिस ने फौरन उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गई.
इसके बाद पुलिस ने बजरंग दल के दो नामजद और छह अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. इस कार्रवाई से वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ता नाराज हो गए और बड़ी संख्या में सोरों थाना पहुंच गये. उन्होंने अपने साथियों के खिलाफ केस वापस लेने की मांग की और नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्श करने लगे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि सभी पहलुओं से पूरे मामले की जांच की जा रही है. मांस के नमूनों की जांच के लिए उसे लैब भेजा गया, जबिक मुस्लिम नौजवान से पूछताछ की जा रही है. हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने हिंदूवादी संगठनों को समझाया और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया तो वह मौके से हट गए.